टाटा ट्रस्ट्स ने वित्त वर्ष 2026 में ₹1,556 करोड़ बांटे। नोएल टाटा ने देशभर में 40-50 गैर-लाभकारी अस्पतालों का नेटवर्क बनाने और 2026-31 की स्वास्थ्य रणनीति की घोषणा की।

बिजनेस डेस्क। स्टार समाचार वेब
भारत के सबसे बड़े और प्रमुख परोपकारी संगठन टाटा ट्रस्ट्स ने देश की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। वित्त वर्ष 2025-26 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में टाटा ट्रस्ट्स ने बताया है कि वह देशभर में 40 से 50 गैर-लाभकारी (Non-profit) सामान्य अस्पतालों का एक विस्तृत नेटवर्क तैयार करने पर काम कर रहा है।
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने वार्षिक रिपोर्ट में अपने संदेश के जरिए इस पहल की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण और किफायती इलाज की सुविधा पहुंचाना है, ताकि किसी भी व्यक्ति को आर्थिक तंगी के कारण बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहना पड़े।
प्रस्तावित अस्पताल नेटवर्क को एक टिकाऊ और सेवा-उन्मुख क्रॉस-सब्सिडी मॉडल पर संचालित किया जाएगा। इस मॉडल के तहत जो मरीज इलाज का खर्च उठाने में सक्षम हैं, उनसे ली जाने वाली फीस का उपयोग उन जरूरतमंद और गरीब मरीजों के मुफ्त या रियायती इलाज में किया जाएगा, जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते।
हालांकि, वार्षिक रिपोर्ट में इस अस्पताल नेटवर्क के निर्माण के लिए तय किए गए कुल वित्तीय निवेश, अस्पतालों के संभावित स्थानों और इस वृहद परियोजना को पूरा करने की अंतिम समयसीमा का अभी खुलासा नहीं किया गया है।
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए टाटा ट्रस्ट्स ने वर्ष 2026 से 2031 के लिए अपनी पंचवर्षीय स्वास्थ्य रणनीति भी सार्वजनिक की है। इस रणनीति का लक्ष्य देश के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे को नई मजबूती प्रदान करना है।
इस 5-वर्षीय योजना के तहत निम्नलिखित प्रमुख लक्ष्य तय किए गए हैं:
लगभग 75 ब्लॉक में 25 लाख से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना।
100 से ज्यादा सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) की कार्यप्रणाली और सुविधाओं को सुदृढ़ करना।
10 लाख बुजुर्गों (Senior Citizens) को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करना।
20,000 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों (Healthcare Workers) को विशेष प्रशिक्षण देना।
मधुमेह (Diabetes) और उच्च रक्तचाप (Hypertension) जैसी गैर-संचारी बीमारियों के प्रबंधन पर विशेष ध्यान केंद्रित करना।
वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स ने समाप्त हुए वित्तीय वर्ष (FY26) के दौरान विभिन्न सामाजिक एवं विकास कार्यों के लिए कुल 1,556.31 करोड़ रुपये का आवंटन और वितरण किया।
कहां- कितनी राशि खर्च होगी
ग्रामीण विकास एवं आजीविका: सबसे अधिक ₹457.62 करोड़ आवंटित किए गए।
शिक्षा क्षेत्र: ₹270.26 करोड़ प्रदान किए गए।
कैंसर देखभाल (Cancer Care): ₹178.46 करोड़ का योगदान दिया गया।
संस्थानीय सहायता: ₹169.31 करोड़ दिए गए।
स्वास्थ्य सेवाएं: ₹105.97 करोड़ आवंटित किए गए।
कुल वितरित राशि में से ₹1,353.32 करोड़ संस्थागत अनुदान (Institutional Grants) और प्रत्यक्ष परियोजनाओं पर खर्च किए गए, जबकि ₹202.99 करोड़ की राशि व्यक्तिगत अनुदान के रूप में बांटी गई (जिसमें से ₹143.30 करोड़ मेडिकल इमरजेंसी और ₹59.38 करोड़ शिक्षा सहायता के लिए दिए गए)।
टाटा ट्रस्ट्स की रिपोर्ट में बताया गया कि बीते वित्त वर्ष में उसके कैंसर देखभाल कार्यक्रमों के माध्यम से 1,06,626 बाह्य रोगी परामर्श (OPD Consultations) प्रदान किए गए। इस दौरान कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए 24,874 कीमोथेरेपी चक्र पूरे किए गए और 2,879 जटिल सर्जरी संपन्न कराई गईं। स्वास्थ्य के अलावा, ट्रस्ट की आजीविका पहलों से करीब 4 लाख ग्रामीण परिवारों की आय और जीवन स्तर में सुधार हुआ। वहीं, शिक्षा कार्यक्रमों के जरिए 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 21 लाख छात्रों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुँचाया गया।
किसी भी सामाजिक काम की सफलता का वास्तविक मूल्यांकन सिर्फ इस बात से नहीं होना चाहिए कि कितनी राशि खर्च की गई या कितने लाभार्थियों तक पहुंच बनाई गई। असली पैमाना यह होना चाहिए कि हमारे प्रयासों से समाज में कितना दीर्घकालिक और स्थायी बदलाव आया है। टाटा ट्रस्ट्स का ध्यान हमेशा ऐसी संस्थाओं और व्यवस्थाओं के निर्माण पर रहेगा जो आने वाले लंबे समय तक समाज की निस्वार्थ सेवा कर सकें।

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