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थैलीसीमिया कांड के दो माह बाद भी संदिग्ध डोनर अज्ञात, जांच फिर सवालों में

सतना जिला अस्पताल के थैलीसीमिया कांड को दो महीने बीत जाने के बाद भी संक्रमित रक्त के संदिग्ध डोनरों की पहचान नहीं हो सकी है। इंदौर से आई सीडीएससीओ की टीम ने एक बार फिर ब्लड बैंक का निरीक्षण कर दस्तावेजों की जांच की, लेकिन आधिकारिक चुप्पी बनी रही।

By: Yogesh Patel

Feb 06, 202612:21 PM

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थैलीसीमिया कांड के दो माह बाद भी संदिग्ध डोनर अज्ञात, जांच फिर सवालों में

हाइलाइट्स

  • थैलीसीमिया कांड के दो माह बाद भी संदिग्ध डोनरों की पहचान नहीं
  • सीडीएससीओ टीम ने बंद कमरे में की जांच, बाहर भटकते रहे परिजन
  • ब्लड बैंक बंद रहने से गंभीर मरीजों को नहीं मिला समय पर खून

सतना, स्टार समाचार वेब

थैलीसीमिया कांड उजागर होने के दो माह बीतने के बाद भी संदिग्ध डोनरों की अब तक पहचान नहीं हो सकी है, अधिकारिक चुप्पी से टीम की जांच अभी तक सवालों के घेरे में है। बुधवार को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में इंदौर से आई दो सदस्यीय सीडीएससीओ की टीम के द्वारा दोबारा से गतिविधियों का आंकलन किया गया साथ ही ब्लड बैंक के दस्तावेज खंगाले गए। यह जांच पूर्व में जारी नोटिस के तहत की गई जिसमे नए मानकों के अनुरूप कार्यों की गतिविधियां देखी गई। जांच के दौरान ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. अंकिता पांडेय एवं ड्रग इंस्पेक्टर प्रियंका चौबे मौजूद रही। गौरतलब है कि केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) इंदौर की टीम द्वारा पूर्व में जारी ब्लड बैंक के नए मानकों के अनुपालन का निरीक्षण किया जा रहा है। टीम द्वारा मंगलवार को बिरला अस्पताल के ब्लड बैंक का निरीक्षण किया गया था। टीम में औषधि नियंत्रक पुष्पराज कुमार सिंह एवं औषधि निरीक्षक सचिन कुमार बी. कपसे शामिल हैं। जिला अस्पताल में थैलीसीमिया से पीड़ित 4 बच्चों को संक्रमित खून चढाने का मामला दिसमबर में उजागर हुआ था, जिसकी प्रारंभिक जांच में तीन कर्मियों को निलंबित किया गया था। लेकिन आज तक संदिग्ध डोनर की पहचान उजागर नहीं हो पाई है। 

गेट पर ताला, एक दर्जन परिजन परेशान 

बताया गया कि सुबह11 बजे टीम जिला अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंची, अधिकारियों के पहुंचते ही ब्लड बैंक के गेट पर ताला लगा दिया गया। ताला लगाने के बाद बंद कमरे में ही जांच की गई, इस दौरान ब्लड बैंक के बाहर एक दर्जन परिजनों की कतार लगी रही। जांच का हवाला देकर ब्लड बैंक के कर्मियों द्वारा न तो किसी परिजनों को ब्लड दिया गया और न ही रक्तदाताओं की जांच की गई। परिजनों द्वारा कई बार अधिकारियों से भी बात की गई लेकिन समस्या का हल नहीं निकला। 

प्रभारी के दफ्तर में सभी रिकार्डों की जांच

बंद कमरे में देर शाम तक चली कार्यवाई एक बार फिर घेरे में है। अधिकारियों द्वारा कोई आफीसियल बयान अभी तक जारी नहीं किया गया। बताया गया कि सुबह 11 बजे पहुंची टीम द्वारा जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में संचालित गतिविधियां जांची गई। इस दौरान डोनर के फार्म और डोनर काउंसलिंग भी देखी गई। ब्लड बैंक के सभी दस्तावेज जांचे गए। हालांकि किसी भी कर्मी से कोई पूंछताछ नहीं की गई लेकिन प्रभारी के दफ्तर में सभी रिकार्डों की जांच की गई। सभी गतिविधियों को रजिस्टर में दर्ज करने के बाद टीम देर रात रवाना हो गई। जांच के चलते दूर-दराज से आए मरीजों के परिजन खून लेने के लिए परेशान दिखे। जांच का हवाला देकर न तो रक्तदाताओं की जांच की जा रही थी न बदले में खून दिया जा रहा था। 

परिजनों का दर्द मरीज मैहर में भर्ती, यहां ताला लगा है 

मैहर से आए वीरेन्द्र केवट ने बताया कि सुबह 11 बजे से ब्लड डोनर द्वारा ब्लड डोनेट किया गया है लेकिन शाम साढे 4 बजे तक ब्लड उपलब्ध नहीं कराया गया। मैहर सिविल अस्पताल में पत्नी रन्नू केवट भर्ती है जिसका हीमोग्लोबिन 3.9 है, मरीज को ए पॉजटिव ब्लड की जरूरत है। मैहर ब्लड स्टोरेज में भी ब्लड उपलब्ध नहीं था जिसके कारण सतना जिला अस्पताल आना पड़ा। मरीज की हालत गंभीर है लेकिन कर्मी बार-बार जांच का हवाला दे रहे हैं। 

तीन दिन से लगा रहा हूं चक्कर 

अमरपाटन से आए पुष्पराज कोल ने बताया कि तीन दिन से बच्ची जिला अस्पताल में भर्ती है, बच्ची का मिसगैरेज के चलते खून की कमी बताई गई है। तीन दिनों से ब्लड के लिए भटक रहे हैं लेकिन ब्लड उपलब्ध नहीं हुआ। बुधवार को ब्लड डोनर को लेकर सुबह से इंतजार में बैठे हैं लेकिन जांच के चलते ब्लड डोनेट ही नहीं हुआ है, मरीज को ए.बी. पॉजटिव ब्लड की आवश्यकता है।

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