मध्यप्रदेश के निगम-मंडलों और विकास प्राधिकरणों में लंबे समय से प्रतीक्षित राजनीतिक नियुक्तियों का काउंटडाउन शुरू हो गया है। भाजपा ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए अब अलग-अलग सूचियों के बजाय एक ही जंबो सूची जारी करने का फैसला किया है। अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर नेताओं का पुनर्वास होगा।

नई दिल्ली में आयोजित "संवाद एवं रात्रि भोज" कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के सांसद गण के साथ सम्मिलित ।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश के निगम-मंडलों और विकास प्राधिकरणों में लंबे समय से प्रतीक्षित राजनीतिक नियुक्तियों का काउंटडाउन शुरू हो गया है। भाजपा ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए अब अलग-अलग सूचियों के बजाय एक ही जंबो सूची जारी करने का फैसला किया है। अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर नेताओं का पुनर्वास होगा। दावा किया जा रहा है कि मप्र विधानसभा के बजट सत्र से पहले कुछ नियुक्तियों की सूची जारी हो जा जाएगी। बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होगा। निगम-मंडलों में नियुक्ति की घोषणा एक साथ नहीं होगी। घोषणा चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। दरअसल, पहले योजना थी कि पहली किस्त में प्रदेश के विकास प्राधिकरणों और क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों-जैसे विध्य, बुंदेलखंड और महाकोशल विकास प्राधिकरण में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्ति की जाए। इसके लिए अलग से सूची भी तैयार कर ली गई थी, लेकिन उसे रोक दिया गया है। मध्य प्रदेश में लंबे समय से प्रतीक्षित निगम-मंडलों और विकास प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश के बाद अब जंबो लिस्ट जारी की जाएगी, जिसमें 35 नेताओं को जगह मिलेगी।
भार्गव को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी
पुनर्वास की दौड़ में सबसे बड़ा नाम प्रदेश के सबसे वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का है। भार्गव के अनुभव और वरिष्ठता को देखते हुए सरकार उन्हें कोई बहुत महत्वपूर्ण और बड़ी संवैधानिक या राजनीतिक जिम्मेदारी सौंप सकती है। उनके अलावा पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। पन्ना से पांच बार के विधायक ब्रजेंद्र प्रताप सिंह, हरिशंकर खटीक, अजय विश्नोई और अर्चना चिटनीस जैसे कद्दावर नेताओं को भी महत्वपूर्ण निगम-मंडलों की कमान सौंपी जा सकती है।
बजट से पहले हो जाएगी घोषणा
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए अमरवाड़ा विधायक कमलेश शाह के नाम पर भी विचार किया जा रहा है। विधानसभा के आगामी बजट सत्र से पहले इन नामों की घोषणा होने की पूरी संभावना है। पार्टी का उद्देश्य उन पूर्व विधायकों और मंत्रियों को सक्रिय करना है, जो अभी किसी पद पर नहीं हैं। इस कवायद के जरिए क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने की भी कोशिश की जाएगी, ताकि चुनौतियों के लिए संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बना रहे। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व मंत्री रामनिवास रावतसंगठन से बड़े दायित्व की उम्मीदें बांधे बैठे हैं।
नियुक्तियों को लेकर दबाव
इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दो दिन पूर्व दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल के साथ चर्चा की। इसमें प्रस्तावितों के नामों पर विचार किया गया। अब सूची को अंतिम रूप देकर जल्द ही सूची जारी की जाएगी। विधानसभा चुनाव-2023 के बाद से ही निगम-मंडलों में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर संगठन पर दबाव है।
विंध्य के नेताओं में असंतोष
दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा हुई। इसमें सभी पहलूओं पर विचार कर तय किया गया कि क्षेत्रीय और अन्य समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नियुक्तियां की जाएंगी। इसमें कुछ पूर्व विधायक और पूर्व निमम मंडल के अध्यक्षों को भी समायोजित किया किया जाएगा। इधर, दावा किया जा रहा है कि उक्त राजनीतिक नियुक्तियों में सबसे अधिक पद विंध्य और महाकोशल के नेताओं को दिए जाएंगे। चूंकि यहां के नेताओं की सत्ता में अभी नाम मात्र की भागीदारी है। इससे नेताओं में असंतोष है। इसी को देखते हुए तय किया गया है कि विंध्य से अधिकांश नेताओं को निगम मंडलों की कमान सौंपी जाए।


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