देश के विभिन्न राज्यों में मानसून अपना रौद्र रूप दिखा रहा है। विशेष रूप से मध्य प्रदेश में मूसलाधार बारिश के चलते कई जिलों में नदी-नाले उफान पर हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रदेश के कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है।
बारिश का मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है। मानसून में अपनी सेहत, खानपान और त्वचा का खास ख्याल कैसे रखें, जानें इससे जुड़े बेहतरीन लाइफस्टाइल टिप्स।
संसद के मानसून सत्र के 12वें दिन हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां भाजपा और सहयोगी दलों की महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक हुई। वहीं दूसरी तरफ संसद के भीतर कई अहम विधायी कार्यों के साथ-साथ हंगामे के पूरे आसार बने हुए हैं।
देश के बड़े हिस्से में मानसून एक बार फिर विकराल रूप ले चुका है। भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। दक्षिण के केरल-कर्नाटक में जहां प्राकृतिक आपदाओं के कारण 9 लोगों की जान जा चुकी है और 6 लोग लापता हैं।
मध्यप्रदेश में मानसून अब लगभग सक्रिय हो चुका है। इस कारण कई जिलों में तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है। वहीं मौसम विभाग ने आठ जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। दावा किया जा रहा है कि अगले 24 घंटे में 4 इंच से ज्यादा बारिश होगी।
लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा संशोधन बिल पर विपक्ष के हंगामे के कारण सोमवार को गतिरोध जारी रहा। मंगलवार दोपहर 12 बजे से छह घंटे से अधिक चर्चा होने की संभावना है।
मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार तेज हो गई है। मौसम विभाग ने अगले 4 दिनों तक 35 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी दी है। जानिए अपने जिले का हाल।
देशभर में मानसून की भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में नदियां उफान पर हैं और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। गुजरात में मानसून ने विकराल रूप धारण कर लिया है।
मध्यप्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र भारी हंगामे और राजनीतिक खींचतान के बीच निर्धारित समय से दो दिन पहले यानी महज तीन दिन में ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। पूरे सत्र के दौरान बेरोजगारी, शिक्षा, वित्तीय प्रबंधन और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन से लेकर परिसर तक जमकर राजनीतिक गहमागहमी रही। एक ओर जहां कांग्रेस विधायकों ने अनोखे अंदाज में सांकेतिक नाटक का मंचन कर सरकार को घेरा। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर विपक्ष के आरोपों का तथ्यों के साथ जवाब देने की रणनीति तैयार की।






















