उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में गंगा दशहरा पर 38 साल पुरानी परंपरा को निभाते हुए 16 घंटे की अखंड नृत्य आराधना शुरू हुई। 4 से 40 वर्ष की महिला कलाकारों ने दी प्रस्तुति।

महाकाल की शयन आरती तक नृत्यांजलि
उज्जैन। स्टार समाचार वेब
धर्म और आस्था की नगरी उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर में गंगा दशहरा के पावन पर्व पर एक अद्भुत और अलौकिक नजारा देखने को मिल रहा है। मंगलवार सुबह 6:30 बजे से बाबा महाकाल के आंगन में 'अखंड नृत्य आराधना' की शुरुआत हो चुकी है। भक्ति और कला का यह अनूठा संगम लगातार 16 घंटे तक बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। कलाकार रात को होने वाली भगवान महाकाल की शयन आरती तक अपनी नृत्यांजलि अर्पित करते रहेंगे।
महाकाल मंदिर के परिसर में चल रही यह नृत्य आराधना पूरी तरह से अविरल (बिना रुके) है। कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए इसमें शामिल होने वाले प्रत्येक नृत्य समूह को 15 से 20 मिनट का समय अलॉट किया गया है। जैसे ही एक समूह की प्रस्तुति समाप्त होती है, ठीक उसी क्षण दूसरा समूह मंच संभाल लेता है, जिससे नृत्य और भक्ति की यह श्रृंखला लगातार प्रवाहित हो रही है।
इस भव्य आयोजन की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसमें उम्र का कोई बंधन नजर नहीं आ रहा है। मंच पर जहां एक तरफ 4 साल की नन्हीं और मासूम बच्चियां अपनी चपलता से सबका मन मोह रही हैं, वहीं 40 साल तक की अनुभवी महिला कलाकार भी शास्त्रीय और लोक नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां दे रही हैं।
गणेश वंदना: प्रथम पूज्य भगवान गणेश की आराधना के साथ कार्यक्रम का मंगल शुभारंभ हुआ। भगवान भोलेनाथ और शक्ति स्वरूपा माता की स्तुति पर कलाकारों के भावपूर्ण नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक भजनों और मालवी व अन्य लोकगीतों की थाप पर कलाकारों ने समां बांध दिया। नृत्य के साथ-साथ युवा विद्यार्थियों द्वारा किया जा रहा सामूहिक तबला वादन भी इस पूरे कार्यक्रम में आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
महाकाल राजा के दरबार में नृत्य सेवा की यह परंपरा कोई नई नहीं है। 'रसराज प्रभात नृत्य संस्थान' पिछले 38 सालों से लगातार हर वर्ष गंगा दशहरा के मौके पर इस भव्य अखंड नृत्य आराधना का आयोजन करता आ रहा है।
इस 16 घंटे के महा-अनुष्ठान को सफल बनाने के लिए संस्थान के कलाकार पिछले एक महीने से कड़ी मेहनत और जी-तोड़ अभ्यास कर रहे थे। कलाकारों ने उज्जैन शहर के अलग-अलग स्थानों पर घंटों रिहर्सल की, ताकि महाकाल के सामने उनकी प्रस्तुति में कोई कमी न रह जाए। इस वर्ष आयोजन में 50 से अधिक मुख्य कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।
भक्ति और कला के इस महोत्सव में कई गणमान्य नागरिक और अतिथि साक्षी बने। कार्यक्रम में रसराज प्रभात नृत्य संस्थान के संस्थापक राज कुमुद ठोलिया मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
इसके अलावा, मुख्य अतिथि के रूप में अर्पण भारद्वाज और गोविंद गंधे शामिल हुए। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में संजय मिश्रा, पंडित विशाल शुक्ला और भारती सिंह राजपूत ने उपस्थित होकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।

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