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उमा भारती का बड़ा बयान: नेताओं-उद्योगपतियों की शादियों में फिजूलखर्ची भ्रष्टाचार की जड़

टीकमगढ़ में उमा भारती ने कहा कि शादियों में करोड़ों की फिजूलखर्ची भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है। नेताओं और उद्योगपतियों से सादगी अपनाने की अपील की। बच्चों में बढ़ती हीन भावना पर भी जताई चिंता।

By: Ajay Tiwari

Dec 05, 20254:12 PM

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उमा भारती का बड़ा बयान: नेताओं-उद्योगपतियों की शादियों में फिजूलखर्ची भ्रष्टाचार की जड़

टीकमगढ़। स्टार समाचार वेब

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि देश में शादियों में बढ़ती फिजूलखर्ची समाज और व्यवस्था—दोनों के लिए हानिकारक है। उन्होंने कहा कि कई नेता और बड़े उद्योगपति अपनी शादियों में करोड़ों रुपये केवल दिखावे पर खर्च कर देते हैं, जबकि इसी धन से हजारों जरूरतमंद बेटियों के विवाह कराए जा सकते हैं।
उन्होंने इसे “भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली आदत” बताते हुए कहा कि यदि समाज सीमित साधनों में आयोजन करना शुरू कर दे, तो यह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन बन सकता है। उमा भारती ने कहा, “पहले नारा था ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’, अब कहना पड़ेगा ‘भ्रष्टाचारी भारत में रहो, लेकिन सुधर जाओ।’” पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने जोर देकर कहा कि भ्रष्टाचार को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अगले दस वर्षों तक पद पर बने रहना जरूरी है। पूर्व मुख्यमंत्री अपनी माता के नाम पर आयोजित यात्रा के बाद मीडिया से चर्चा कर रही थीं। इसी दौरान उन्होंने जनप्रतिनिधियों और उद्योगपतियों से अपील की कि वे शादियों में दिखावा न करें। उन्होंने कहा कि नेताओं की इज्जत पद और कार्य के कारण पहले से ही होती है, इसलिए अनावश्यक खर्च करने का कोई लाभ नहीं है।

हाइलाइट्स

  • उमा भारती ने शादियों में करोड़ों की फिजूलखर्ची को बताया भ्रष्टाचार की वजह

  • नेताओं और उद्योगपतियों से सादगीपूर्ण विवाह करने की अपील

  • बच्चों में बढ़ती हीन भावना और सामाजिक प्रतिस्पर्धा पर चिंता व्यक्त

  • उद्योगपतियों की शादियों के निमंत्रण स्वीकार न करने का फैसला

बच्चों में बढ़ रही हीन भावना

उमा भारती ने बताया कि वह अब उद्योगपतियों की अतिश्योक्तिपूर्ण शादियों में शामिल नहीं होतीं और अपने सुरक्षा कर्मियों को भी ऐसे निमंत्रण स्वीकार न करने का निर्देश दे चुकी हैं। उन्होंने कहा कि समाज में सुविधाओं को लेकर प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई है कि बच्चे हीन भावना से ग्रस्त होने लगे हैं। माता-पिता अपने बच्चों को पीछे न रहने देने की होड़ में भ्रष्टाचार तक करने लगते हैं। जबकि अच्छे संस्कार और जीवनशैली सीमित संसाधनों में भी दी जा सकती है। उन्होंने समाज और नेताओं से आग्रह किया कि शादियों में अनावश्यक खर्च बंद करें और सादगी को बढ़ावा दें, ताकि सामाजिक असमानता और भ्रष्टाचार दोनों कम किए जा सकें।

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