धार की ऐतिहासिक भोजशाला मामले में ASI की 98-दिवसीय वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट आज इंदौर हाईकोर्ट में पेश होगी। जानें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और पूजा-नमाज की वर्तमान व्यवस्था पर इसका प्रभाव।

इंदौर। स्टार समाचार वेब
धार की ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर आज का दिन निर्णायक साबित हो सकता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए 98 दिनों के विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे की रिपोर्ट सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष खोली जाएगी। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के साथ ही यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक स्थल का वास्तविक स्वरूप क्या है।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद, न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। कार्यसूची में यह मामला 62वें नंबर पर सूचीबद्ध है। सुनवाई के दौरान रिपोर्ट की प्रतियां हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सौंपी जाएंगी। यह पहली बार होगा जब 98 दिनों तक चली खुदाई, कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक परीक्षणों के निष्कर्ष सार्वजनिक होंगे। इसी रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय यह तय करेगा कि भोजशाला मंदिर है या मस्जिद।
28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी सुनवाई डिवीजन बेंच द्वारा की जाए। कोर्ट द्वारा तय किए गए प्रमुख बिंदु -
आपत्ति दर्ज करने का अवसर: दोनों पक्षों को रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अपनी आपत्तियां या सुझाव दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जाएगा।
पूजा-नमाज व्यवस्था: जब तक हाईकोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक 7 अप्रैल 2003 को जारी एएसआई का आदेश लागू रहेगा। इसके तहत मंगलवार को हिंदू पक्ष की पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष की नमाज की व्यवस्था यथावत रहेगी।
स्वरूप में बदलाव पर रोक: न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय होने तक भोजशाला के मूल ढांचे या भौतिक स्वरूप में कोई भी बदलाव नहीं किया जाएगा।
धार की भोजशाला लंबे समय से विवाद का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है। वर्तमान वैज्ञानिक सर्वे का मुख्य उद्देश्य जमीन के नीचे दबे साक्ष्यों, शिलालेखों और वास्तुकला के माध्यम से इसकी ऐतिहासिक सच्चाई को उजागर करना है।

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