By: Ajay Tiwari
Feb 18, 20264:28 PM
बजट विश्लेषण
भोपाल. स्टार समाचार
मध्य प्रदेश के वित्तीय इतिहास के फलक पर वर्ष 2026-27 का बजट केवल अंकों की बाजीगरी नहीं, बल्कि 'विकसित मध्य प्रदेश' के संकल्प की एक सुस्पष्ट इबारत है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत यह ₹4,38,317 करोड़ का 'डिजिटल दस्तावेज़' राज्य की प्रगतिशीलता का वह दर्पण है, जिसमें परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम दिखाई देता है।
प्रधानमंत्री के 'जी वाय ए एन' (गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी) संकल्प में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 'आई' (उद्योग और बुनियादी ढांचा) का समावेश करना एक मास्टरस्ट्रोक है। यह 'आई' केवल एक अक्षर नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक रीढ़ को इस्पाती मजबूती देने का मंत्र है। जहाँ एक ओर सामाजिक न्याय की धारा बह रही है, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक गलियारों के निर्माण से राज्य को 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का स्वप्न अब यथार्थ के धरातल पर उतरता प्रतीत हो रहा है।
वर्ष 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' घोषित करना इस सत्य की स्वीकारोक्ति है कि मध्य प्रदेश का हृदय आज भी उसके खेतों में धड़कता है। ₹1.15 लाख करोड़ का विशाल आवंटन और 'पट्टे की जगह रजिस्ट्री' का क्रांतिकारी निर्णय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में 'स्वावलंबन' के नए बीज बोएगा। सौर ऊर्जा (1 लाख सोलर पंप) के माध्यम से खेती को पर्यावरण के अनुकूल और लागत-मुक्त बनाना 'हरित क्रांति' के अगले चरण का उद्घोष है।
शिक्षा और कौशल विकास पर ₹31,953 करोड़ का निवेश यह सुनिश्चित करता है कि प्रदेश का युवा केवल 'डिग्रीधारी' न रहे, बल्कि 'हुनरमंद' बने। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर और उज्जैन का एलिवेटेड कॉरिडोर राज्य की धमनियों में विकास के रक्त का संचार करेंगे। वहीं, सिंहस्थ के लिए किया गया भारी प्रावधान यह दर्शाता है कि अध्यात्म और पर्यटन अब मध्य प्रदेश की 'सॉफ्ट पावर' के साथ-साथ एक सुदृढ़ 'इकोनॉमिक एसेट' भी बन चुके हैं।
बिना किसी नए कर के 30% की विकास दर हासिल करना किसी वित्तीय चमत्कार से कम नहीं है। देश के पहले 'रोलिंग बजट' की अवधारणा को अपनाकर मध्य प्रदेश ने नीतिगत लचीलेपन (Policy Flexibility) का जो उदाहरण पेश किया है, वह इसे भारतीय संघवाद में एक 'पॉलिसी लीडर' के रूप में स्थापित करता है। पीपीपी (PPP) मॉडल से स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार सरकारी सीमाओं के परे जाकर जन-कल्याण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह बजट केवल एक वर्ष का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि 'विजन 2047' की ओर प्रस्थान करती एक द्रुतगामी एक्सप्रेस है। इसमें लाड़ली बहनों का आशीर्वाद है, युवाओं का आत्मविश्वास है और अन्नदाता का पसीना है। यह "आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश" के निर्माण की दिशा में एक ऐसा "रोडमैप" है जो आंकड़ों से कहीं अधिक 'आत्मबल' पर टिका है।
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