आज वट सावित्री अमावस्या और शनि जयंती का विशेष संयोग बना, जिससे प्रदेशभर में सुबह से ही धार्मिक माहौल रहा। इस दुर्लभ अवसर पर मंदिरों और पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुहागिन महिलाओं ने जहां पति की दीघार्यु के लिए वट वृक्ष की पूजा की। वहीं भक्तों ने शनिदेव की आराधना कर कष्टों से मुक्ति की कामना की।

शहर के सभी प्रमुख मंदिरों और पूजा स्थलों पर सामान्य दिनों की तुलना में भक्तों की काफी अधिक भीड़ देखी गई।
कमला पार्क स्थित शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
उंगली पर तिल-तेल चढ़ाने की रीत रही आकर्षण का मुख्य केंद्र
महाकाल की नगरी में देश के कोने-कोने से पहुंचे हजारों श्रद्धालु
पनोती और पितृदोष से मुक्ति के लिए शिप्रा तट पर उमड़ी भीड़

भोपाल। स्टार समाचार वेब
आज वट सावित्री अमावस्या और शनि जयंती का विशेष संयोग बना, जिससे प्रदेशभर में सुबह से ही धार्मिक माहौल रहा। इस दुर्लभ अवसर पर मंदिरों और पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुहागिन महिलाओं ने जहां पति की दीघार्यु के लिए वट वृक्ष की पूजा की। वहीं भक्तों ने शनिदेव की आराधना कर कष्टों से मुक्ति की कामना की। दरअसल, मध्यप्रदेश में आज शनिश्चरी अमावस्या मनाई जा रही है। सुबह से शनि और हनुमान मंदिरों में विशेष-पूजा अर्चना सिलसिला शुरू हो गया। राजधानी भोपाल के बोर्ड आफिस, टीटी नगर, नेहरू नगर सहित शहर के सभी शनि मंदिरों में कष्टों के निवारण के लोग पूजा-अर्चना करते नजर आए। जीवन में शनि देव की कृपा बनी रहे, इसके लिए शनिदेव को तेल-तिल सहित पुष्प अर्पित किए। इसके साथ ही शनिदेव का विशेष श्रृंगार किया गया। पंडित सुरेंद्र त्रिपाठी ने एक खास चर्चा के दौरान बताया कि शनि देव की पूजा से मेष, मिथुन, कन्या, तुला व मीन राशि पर कृपा बरसेगी। इस राशि के युवक-युवतियो के लिए शनिदेव जी की पूजा-अर्चना बहुत जरूरी है।

वर्षों बाद बना शनिवार के दिन यह शुभ संयोग
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, कई वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है जब शनिवार के ही दिन वट सावित्री अमावस्या और शनि जयंती एक साथ पड़ी हैं। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इस संयोग को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जा रहा है। इसी विशेष महत्व के कारण शहर के सभी प्रमुख मंदिरों और पूजा स्थलों पर सामान्य दिनों की तुलना में भक्तों की काफी अधिक भीड़ देखी गई।

मंदिर में रिकॉर्ड तोड़ भीड़
इधर, शहर के कमला पार्क स्थित प्रसिद्ध शनि मंदिर में आज शनि जयंती का महापर्व बेहद हर्षोल्लास और अटूट आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अलसुबह से ही मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं का तांता लग गया। कोविड महामारी के बाद यह पहला मौका था जब मंदिर में रिकॉर्ड तोड़ भीड़ दर्ज की गई। भक्तों ने शनिदेव को तिल, तेल, काले वस्न और मोमबत्ती अर्पित कर सुख-समृद्धि और कष्ट निवारण की कामना की।
पीढ़ियों पुरानी अनोखी रीत
मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच उंगली पर तिल और तेल चढ़ाने की पारंपरिक रीत मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, सभी अपने हाथों और उंगलियों पर काले तिल रखकर उस पर सरसों का तेल अर्पित करते नजर आए। स्थानीय श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस विशेष विधि से पूजा करने पर साढ़ेसाती, देय्या और अन्य शनि दोषों का तत्काल निवारण होता है।
उज्जैन त्रिवेणी संगम पर आस्था का सैलाब

इधर, धार्मिक नगरी उज्जैन में शनिश्चरी अमावस्या के पावन अवसर पर एक बार फिर आस्था का अनूठा नजारा देखने को मिला। देश के कोने-कोने से आए हजारों श्रद्धालु देर रात से ही त्रिवेणी संगम घाट पर जुटने लगे थे। सुबह होते-होते यह संख्या कई गुना बढ़ गई। मान्यता है कि जब भी अमावस्या तिथि शनिवार के दिन पड़ती है, तो उसका महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है। इस विशेष संयोग पर पुण्य सलिला शिप्रा नदी में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया।
पनोती छोड़ने की अनोखी परंपरा
त्रिवेणी घाट पर स्नान के बाद श्रद्धालु भगवान शनि देव के दर्शन और तेल दान करने के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आए। इस दौरान एक बेहद खास और प्राचीन परंपरा का निर्वाह भी किया गया। लोग अपने कष्टों, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए पनोती के रूप में अपने पुराने कपड़े, जूते और चप्पल घाट पर ही छोड़।


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