मध्य प्रदेश में सालों से रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया को गति मिल गई है। राज्य शासन ने लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके साथ ही प्रमोशन में आरक्षण को लेकर विवाद और भी तेज हो गया है।

भोपाल। स्टार समाचार बेव
मध्य प्रदेश में सालों से रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया को गति मिल गई है। राज्य शासन ने लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके साथ ही प्रमोशन में आरक्षण को लेकर विवाद और भी तेज हो गया है। सपाक्स जैसे कर्मचारी संगठन सरकार के नए नियमों का विरोध करते हुए इन्हें हाईकोर्ट में चुनौती देने ऐलान कर चुके हैं। इसी बीच राज्य सरकार ने पदोन्नति नियम को लेकर एमपी हाईकोर्ट में कैविएट लगाई है। दरअसल, मप्र कैबिनेट के लोकसेवा पदोन्नति नियम-2025 को मंजूरी देने के 48 घंटे बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रमोशन से जुड़े नियम जारी कर दिए हैं। गजट नोटिफिकेशन भी कर दिया गया है। सरकार ने कहा है कि 9 साल से प्रमोशन बंद होने से बड़ी संख्या में कर्मचारी-अधिकारी बगैर पदोन्नत हुए रिटायर हो रहे हैं। ऐसी हालत में राज्य सरकार की कार्यक्षमता पर विपरीत असर पड़ रहा है और कर्मचारियों का मनोबल भी घट रहा है। इसलिए सरकार ने पदोन्नति के नए नियम बनाए हैं। पदोन्नति नियम बनाए जाने के दौरान आरक्षित वर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने और प्रशासनिक दक्षता और योग्यता को महत्व दिया गया है।
नियमों में कहा गया है कि सीधी भर्ती के पदों में एससी-एसटी वर्ग को 16 और 20 फीसदी आरक्षण दिए जाने का प्रावधान है। इसलिए सरकार प्रमोशन में भी इन्हें इसी आधार पर आगे बढ़ने का मौका देने के लिए प्रतिबद्ध है। गजट नोटिफिकेशन के साथ ही सरकार के ये नियम प्रभावी हो गए हैं।
राज्य शासन की ओर से पदोन्नति से भरे जाने वाले हर संवर्ग के पदों को अलग से तय किया जाएगा। इसके लिए समिति द्वारा फैसला लिया जाएगा। समिति के अध्यक्ष विभाग के सचिव और विभागाध्यक्ष सचिव होंगे। समिति में उपसचिव या उससे अधिक ऊंचे पद का जीएडी का एक अफसर भी शामिल होगा। इसके साथ ही इन तीनों सदस्यों में से कोई एक सदस्य एससी वर्ग का नहीं होने पर एससी वर्ग का एक सेकेंड क्लास अधिकारी भी समिति में शामिल किया जाएगा।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा बनाए नियमों में कहा गया है कि जो कमेटी बनाई जाएगी वह साल 2024 से 2028 तक की विभागीय पदोन्नति समिति के लिए लागू मानी जाएगी। पांच साल के बाद इस कमेटी को फिर नए सिरे से बदला जा सकेगा।
अब नए नियमों के विरोध और विवाद की आशंका को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने जबलपुर मुख्यपीठ सहित इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों में कैविएट दायर कर दी है। इसका उद्देश्य है कि यदि कोई नियम या प्रावधान कोर्ट में चुनौती दी जाए तो सरकार को पहले से सूचित किया जाए ताकि वह अपना पक्ष रख सके।
इधर, मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक का कहना है कि वे नए नियमों से सहमत नहीं हैं। जो पुराने नियम कोर्ट ने निरस्त किए थे। ये नए नियम भी बिल्कुल वैसे ही हैं। हम इसका विरोध करेंगे और कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। हमें पदोन्नति नियम-2025 में लागू किए गए कई प्रावधानों पर आपत्ति है। नए नियमों में कई प्रावधान अव्यवहारिक और असमानता बढ़ाने वाले हैं।


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