अवैध खनन से जुड़े एक लंबे समय से लंबित मामले में भाजपा विधायक संजय पाठक की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। हाई कोर्ट जस्टिस को सीधे फोन लगाने के खुलासे के बाद उनके वकीलों ने मुकदमे से हाथ खींच लिए हैं।हाई कोर्ट को भेजे पत्र में पाठक के वकील अंशुमान सिंह ने 1 सितंबर की सुनवाई के दौरान हुए घटनाक्रम का जिक्र किया है।

भाजपा विधायक संजय पाठक की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
भोपाल। स्टार समाचार वेब
अवैध खनन से जुड़े बहुचर्चित केस में भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री संजय पाठक की कानूनी दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मध्यप्रदेश होईकोर्ट के जज को सीधे फोन लगाने के मामले के खुलासे के बाद पाठक का पक्ष रखने वाले अधिवक्ताओं ने भी उनके मुकदमों से दूरी बना ली है। एक सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय में यह तथ्य सामने आया कि विधायक की ओर से एक रिश्तेदार ने सीधे न्यायाधीश से संपर्क किया था। केस की सुनवाई में ही जस्टिस विशाल मिश्रा ने भी इसका खुलासा किया था और वह मामले से अलग हो गए। इस घटना की जानकारी अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने लिखित रूप से उच्च न्यायालय को दी। इसके बाद अंशुमान सिंह ने भी पाठक के मुकदमे से हाथ खींच लिए। बताया जा रहा है कि पाठक से जुड़ी कंपनियों के मामले देख रहे चार और वकीलों ने भी वकालतनामा वापस ले लिया है।
यह पूरा मामला जनवरी 2025 का है। कटनी निवासी आशुतोष उर्फ मनु दीक्षित ने ईओडब्ल्यू को शिकायत दी थी। इसमें निर्मला मिनरल्स, आनंद माइनिंग कॉपोर्रेशन और पैसिफिक एक्सपोर्ट्स नाम की कंपनियां बड़े पैमाने पर अवैध खनन कर रही हैं। जांच में आरोप सही पाए जाने पर सरकार ने इन कंपनियों पर 443 करोड़ का भारी जुर्माना लगाया था। इसके खिलाफ कंपनियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की हुई है।
गौरतलब है कि हाल ही में हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अवैध खनन से जुड़े आशुतोष दीक्षित बनाम ईओडब्ल्यू केस की सुनवाई से अचानक खुद को अलग कर लिया। जस्टिस मिश्रा ने केस की आर्डर शीट में उल्लेख किया कि विधायक ने उनसे इस केस पर चर्चा करने के लिए सीधे फोन पर बातचीत की कोशिश की। इसलिए मैं इस केस की सुनवाई करने का इच्छुक नहीं हूं। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए केस को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया। अब चीफ जस्टिस यह तय करेंगे कि मामला किस बेंच में सुना जाएगा।


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