मध्यप्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे फर्जीवाड़े पर सख्त एक्शन लिया है। सरकार की कर्रवाई से लूट का अड्डा बन चुके प्राइवेट स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है। आलम यह था कि अधिकांश स्कूल सिर्फ कागजों में संचालित किए जा रहे थे।

मध्यप्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे फर्जीवाड़े पर सख्त एक्शन लिया है। सरकार की कर्रवाई से लूट का अड्डा बन चुके प्राइवेट स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है। आलम यह था कि अधिकांश स्कूल सिर्फ कागजों में संचालित किए जा रहे थे। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सरकार ने शिकंजा कसा है। इस कार्रवाई में बड़ी बात यह है कि राजधानी भोपाल के भी 12 स्कूलों पर गाज गिरी है। मान्यता के लिए हाईस्कूल के लिए कम से कम 4000 वर्गफीट और हायर सेकेंडरी के लिए 5600 वर्गफीट भूमि (निर्मित व खुली) जरूरी है। इसके साथ ही मूलभूत सुविधाएं जैसे शौचालय और प्रयोगशाला भी अनिवार्य हैं। इन मापदंडों को पूरा न करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की गई है। दरअसल, मध्यप्रदेश के 250 निजी स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी गई है। इन स्कूलों द्वारा जमीन संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके थे। कुछ के पास पर्याप्त भूमि नहीं थी तो कुछ के पास रजिस्ट्री के कागजों की कमी पाई गई। वहीं, कुछ स्कूल केवल कागजों पर ही संचालित हो रहे थे। इन स्कूलों की अपीलों को प्रदेश स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने खारिज कर दिया। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त शिल्पा गुप्ता ने मान्यता समाप्ति के आदेश जारी कर दिए।
गौरतलब है कि 9वीं से 12वीं तक के स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया में पहले आवेदन संभागीय संयुक्त संचालकों के पास जाते हैं, यदि वहां से नामंजूर होते हैं तो दूसरी अपील विभागीय मंत्री के पास जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत 350 स्कूलों के प्रकरण मंत्री के पास पहुंचे थे, जिनमें से सिर्फ 50 स्कूलों को मान्यता मिली, जबकि 50 को होल्ड पर रखा गया।
भोपाल के जिन दर्जनभर प्राइवेट स्कूलों पर कार्रवाई की गई है, उसमें अंकुर हायर सेकेंडरी, सेवन हिल्स, प्रीति हायर सेकेंडरी, राजपुष्पा, पार्थ और ज्ञान कृष्णा जैसे नाम शामिल हैं। इनकी मान्यता भूमि संबंधित नियमों को पूरा नहीं करने के कारण समाप्त कर दी गई।
इधर, संस्कारधानी जबलपुर जिले के शहपुरा के प्रोविनेट स्कूल की मान्यता समाप्त होने के बाद छात्रों के अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। पिछले दो महीनों से वे लगातार स्कूल से ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) और मार्कशीट की मांग कर रहे हैं, ताकि बच्चों का दाखिला अन्य स्कूलों में कराया जा सके। लेकिन स्कूल प्रबंधन अब पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई पर संकट के बादल छाने लगे हैं।


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