मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जलबलपुर में गरीब बच्चों के प्रवेश के नाम पर स्कूल संचालकों ने लाखों रुपए का खेला किया है। ईओडब्ल्यू की जांच में स्कूलों का घपला उजागर हो गया है। यहां शिक्षा के अधिकार को स्कूल संचालकों ने मजाक बनाकर रख दिया है। इससे प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है।
साइबर ठगों से आम लोगों के साथ ही अब आईएएस अफसरों को भी सुरक्षित नहीं दिख रहे हैं। इसके बाद भी पुलिस नाकाम साबित हो रही है। इसी बीच मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है।
रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस एडमिशन फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। एक छात्रा ने नीट यूजी 2025 रिजल्ट में नंबर हेरफेर कर प्रवेश लेने की कोशिश की। ऑनलाइन अलॉटमेंट में मामला पकड़ा गया, लेकिन छात्रा फरार हो गई। कॉलेज प्रबंधन ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की। कर्मचारियों की संलिप्तता और मामले को दबाने के आरोप लग रहे हैं।
मध्यप्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे फर्जीवाड़े पर सख्त एक्शन लिया है। सरकार की कर्रवाई से लूट का अड्डा बन चुके प्राइवेट स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है। आलम यह था कि अधिकांश स्कूल सिर्फ कागजों में संचालित किए जा रहे थे।
















