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रीवा का श्याम शाह मेडिकल कॉलेज फिर विवादों में: नीट यूजी रिजल्ट में नंबर हेरफेर कर एमबीबीएस में प्रवेश लेने पहुंची छात्रा, ऑनलाइन अलॉटमेंट में खुली पोल – कॉलेज प्रबंधन ने FIR तक दर्ज नहीं की

रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस एडमिशन फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। एक छात्रा ने नीट यूजी 2025 रिजल्ट में नंबर हेरफेर कर प्रवेश लेने की कोशिश की। ऑनलाइन अलॉटमेंट में मामला पकड़ा गया, लेकिन छात्रा फरार हो गई। कॉलेज प्रबंधन ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की। कर्मचारियों की संलिप्तता और मामले को दबाने के आरोप लग रहे हैं।

By: Yogesh Patel

Aug 29, 20255 hours ago

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रीवा का श्याम शाह मेडिकल कॉलेज फिर विवादों में: नीट यूजी रिजल्ट में नंबर हेरफेर कर एमबीबीएस में प्रवेश लेने पहुंची छात्रा, ऑनलाइन अलॉटमेंट में खुली पोल – कॉलेज प्रबंधन ने FIR तक दर्ज नहीं की

हाइलाइट्स

  • छात्रा ने नीट यूजी रिजल्ट में 154 से 547 अंक कर दिए दर्ज
  • एडमिशन कमेटी की स्क्रूटनी में पास, ऑनलाइन अलॉटमेंट में पकड़ी गई
  • मामला उजागर होने के बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने FIR दर्ज नहीं की

रीवा, स्टार समाचार वेब

श्याम शाह मेडिकल कॉलेज फिर सुर्खियों में है। कुछ साल पहले यहां एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले मुन्नाभाई पकड़े गए थे। बड़ी कार्रवाई हुई थी। इस बार फिर से एक छात्रा इसी तरह एडमिशन लेने पहुंची थी। नीट यूजी के रिजल्ट में नंबर में हेरफेर कर दूसरी छात्रा की जगह प्रवेश लेने पहुंची थी। जब आनलाइन अलॉटमेंट निकाला गया तो पोल खुल गई। पोल खुलने के बाद छात्रा फरार हो गई। इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं की है। 

ज्ञात हो कि अब मेडिकल कॉलेज की सीटों में प्रवेश के लिए एक ही परीक्षा आयोजित होगी है। यूजी नीट के माध्यम से ही परीक्षाएं होती है। फिर कॉलेजों में प्रवेश दिया जाता है। प्रवेश के लिए छात्र कॉलेजों का चयन करते हैं। फिर कॉलेजों में काउंसलिंग और फिर आनलाइन प्रोफार्मा निकालकर दस्तावेजों की स्क्रूटनी के बाद प्रवेश दिया जाता है। 

इस प्रक्रिया में भी फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया पहले चरण की खत्म हो चुकी है। इसी पहले चरण में एक छात्रा फर्जी रिजल्ट लेकर एडमिशन लेने पहुंच गई थी। चयन कमेटी के सदस्यों ने दस्तावेजों की स्क्रूटनी तक में छात्रा को ओके कर दिया था लेकिन एनएमसी के आनलाइन अलाटमेंट में उसका नाम उस नंबर पर आया ही नहीं जिस नंबर पर वह प्रवेश लेने पहुंची थी। इसी में पोल खुल गई। कॉलेज की कमेटी कुछ कर पाती इसके पहले ही छात्रा रफूचक्कर हो गई। चयन कमेटी ने इसकी जानकारी डीन डॉ सुनील अग्रवाल को भी दी लेकिन अब तक छात्रा के खिलाफ किसी तरह का पुलिस एक्शन नहीं लिया गया। थाना में शिकायत भी दर्ज नहीं कराई गई। इतना बड़ा मामला दबा दिया गया। 

स्‍क्रूटनी में हो गई थी पास, ऑनलाइन अलॉटमेंट में पकड़ी गई

फर्जी रिजल्ट लेकर पहुंची छात्रा ने श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में जमकर हंगामा भी मचाया था। बदले हुए नंबर लेकर पहुंची छात्रा ने कॉलेज की एडमिशन कमेटी पर दबाव भी बनाया। जल्द से जल्द एडमिशन देने का दबाव बना रही थी। इसमें मेडिकल कॉलेज के तीन कर्मचारी भी शामिल थे। वह भी फर्जी छात्रा को एडमिशन के लिए कमेटी के सदस्यों पर दबाव बनाने में लगे थे। इसी दबाव में छात्रा के दस्तावेजों की जांच भी हो गई। इसके बाद मामला अलॉटमेंट में पकड़ा गया।

कैलाशपुरी रीवा की बताई जा रही है छात्रा 

मिली जानकारी के अनुसार जिस छात्रा ने फर्जी तरीके से एडमिशन लेने की कोशिश की उसका नाम एंजल तिवारी है। उसका नीट यूजी में रोल नंबर 3006104215 है। उसका नीट यूजी 2025 में आल इंडिया रैंक 1093115 रही। नीट यूजी में एआई स्कोर सिर्फ 145 ही थे। वहीं एमपी स्टेट में रैंक 14399 ही आए थे लेकिन उसने इसमें हेरफेर कर दिया था। स्कोर कार्ड में 154 नंबर को बढ़ा कर 547 के करीब पहुंचा दिया था। 

कमेटी के सदस्यों ने दी डीन को जानकारी

इस फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद छात्रा तो भाग खड़ी हुई लेकिन कार्रवाई कॉलेज प्रबंधन ने कुछ नहीं की। एडमिशन कमेटी के सदस्यों ने इस फर्जीवाड़ा की जानकारी डीन श्याम शाह मेडिकल कॉलेज को भी उपलब्ध कराई लेकिन मामला थाना में दर्ज नहीं किया गया। एक सप्ताह से अधिक का समय गुजर चुका है। सभी ने मामले को दबा दिया है। इसके पीछे वजह कॉलेज के कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता भी मानी जा रही है। 

जवाब देने से बचते रहे डीन

इस संबंध में एमबीबीएस यूजी एडमिशन कमेटी के सदस्यों से चर्चा की गई। उन्होंने इस बात को तो स्वीकार किया कि एडमिशन में फर्जी छात्रा पकड़ी गई थी लेकिन ज्यादा जानकारी देने से बचते रहे। उन्होंने कहा कि डीन को इस संबंध में अवगत करा दिए थे। अधिक जानकारी वहीं दे पाएंगे। वहीं जब डीन से इस  संबंध में बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन पर संपर्क ही नहीं किया। उन्हें कई मर्तबा फोन किया गया लेकिन रिसीव नहीं हुआ।

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