मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री निवास में सौजन्य भेंट की। सीएम ने बताया कि आज यानी मंगलवार को भोपाल निवास पर केंद्रीय मंत्री एवं भाईसाहब शिवराज सिंह चौहान ने आत्मीय भेंट की।
By: Arvind Mishra
Feb 03, 202612:05 PM

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री निवास में सौजन्य भेंट की। सीएम ने बताया कि आज यानी मंगलवार को भोपाल निवास पर केंद्रीय मंत्री एवं भाईसाहब शिवराज सिंह चौहान ने आत्मीय भेंट की। इसके साथ ही विभिन्न मुद्दों खासकर किसानों को लेकर बात की। गौरतलब है कि हाल ही में हुई ओलावृष्टि से कई जिलों में किसानों की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। राहत देने के लिए सरकार सर्वे करा रही है। वहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के दौरान विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा की। सीएम ने केंद्रीय मंत्री को यह भी बताया कि साल 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया गया है। इसी को लेकर राज्य सरकार मार्च से कृषि कैबिनेट की शुरुआत करेगी। इसकी पहली बैठक निमाड़ अंचल के खरगोन या खंडवा में होगी। इसके बाद कृषि कैबिनेट मालवा, महाकोशल, विंध्य, ग्वालियर, चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र के किसी जिले में होगी। पहली कृषि कैबिनेट प्रदेश के पशुपालक किसानों को ब्राजील में ट्रेनिंग के लिए प्रस्तावित योजना को भी हरी झंडी दी जाएगी।
ब्राजील ट्रेनिंग के लिए जाएंगे पशुपालक
कृषि कैबिनेट को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक भी हो चुकी है। योजना के तहत मप्र सरकार प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्नत पशुपालन की ट्रेनिंग लेने ब्राजील भेजेगी। इसके लिए विभाग के अफसर और हर जिले से चुनिंदा किसानों का चयन होगा। इसके तहत लागू होने वाली योजनाओं के लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
मोबाइल- क्यूआर कोड से मिलेगी जानकारी
चर्चा के दौरान यह भी बताया कि मोबाइल नंबर और क्यूआर कोड के जरिए किसानों को कृषि उपकरणों की उपलब्धता की जानकारी देने का सिस्टम तैयार किया जाएगा। जिन किसानों का अब तक किसान क्रेडिट कार्ड नहीं बना है, राजस्व विभाग उन्हें चिन्हित कर नजदीकी प्राथमिक सहकारी साख समितियों (पैक्स) को उसकी जानकारी देगा। इसके बाद पैक्स समितियां किसानों से संपर्क कर उन्हें पात्रता के हिसाब से केसीसी मंजूर कराने में मदद करेंगी। इसके साथ ही पैक्स सोसाइटियां शिविर लगाकर भी केसीसी वितरित करेंगी।