भारत और यूरोपिय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता साइन हो चुका है। 18 साल की बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने नई दिल्ली में इसे हरी झंडी दिखा दी है। यूरोपीय संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक की, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी घोषणा कर दी है।
By: Arvind Mishra
Jan 27, 202611:13 AM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
भारत और यूरोपिय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता साइन हो चुका है। 18 साल की बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने नई दिल्ली में इसे हरी झंडी दिखा दी है। यूरोपीय संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक की, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी घोषणा कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा- यूरोपीय देशों से भारत की डील को लोग दुनिया में मदर ऑफ ऑल कह रहे हैं। भारत-ईयू के बीच ऐतिहासिक समझौते की घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने कहा- कल ही भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक बहुत बड़ा समझौता हुआ है। दुनिया में लोग इसकी चर्चा मदर ऑफ ऑल डील के रूप में कर रहे हैं। यह समझौता भारत के 140 करोड़ लोगों और यूरोपीय देशों के करोड़ों लोगों के लिए बहुत बड़ा अवसर लेकर आया है।
तालमेल का शानदार उदाहरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- यह समझौता दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का एक शानदार उदाहरण है। यह समझौता ग्लोबल जीडीपी के करीब 25 प्रतिशत और ग्लोबल ट्रेड के लगभग एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। यह समझौता ट्रेड के साथ-साथ डेमोक्रेसी और रूल ऑफ लॉ के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को भी सशक्त करता है।
फायदे के साथ नुकसान भी
फायदों के साथ ही अगर बात करें, संभावित नुकसान के बारे में तो तकनीक और फाइनेंशियली यूरोपीय कंपनियां ज्यादा मजबूत हैं, तो ऐसे में भारत के छोटे उद्योगों, लोकल उत्पादकों पर दबाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, भारत ने अब तक किए गए तमाम समझौतों में एग्रीकल्चर और डेयरी सेक्टर को बाहर रखा है, लेकिन अगर इस डील में यूरोप के डेयरी और एग्री प्रोडक्ट्स का भारत में एंट्री मिलती है, तो ये देश के किसानों की कमाई पर असर डाल सकता है। हालांकि, इसकी उम्मीद बेहद कम ही है।
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA)
18 साल का इंतजार खत्म: भारत और EU के बीच लगभग दो दशकों (18 वर्ष) की लंबी बातचीत के बाद मंगलवार को सहमति बनी।
आधिकारिक घोषणा: इसका ऐलान 16वें भारत-EU समिट के दौरान दोनों पक्षों के शीर्ष नेताओं द्वारा किया गया।
लागू होने की तिथि: इस समझौते को 2027 तक पूरी तरह लागू किए जाने की संभावना है।
इस डील का सबसे बड़ा असर आयातित लग्जरी सामानों पर पड़ेगा:
यूरोपीय कारें: BMW, मर्सिडीज और ऑडी जैसी कारों पर लगने वाला भारी-भरकम टैक्स 110% से घटकर मात्र 10% रह जाएगा।
शराब और वाइन: यूरोपीय शराब पर वर्तमान में 150% टैरिफ लगता है, जिसे घटाकर 20% से 30% के दायरे में लाया जाएगा।
आर्थिक शक्ति: भारत वर्तमान में दुनिया की चौथी और यूरोपीय संघ दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
GDP में हिस्सेदारी: दोनों पक्ष मिलकर वैश्विक जीडीपी का लगभग 25% हिस्सा कवर करते हैं।
वैश्विक व्यापार: यह समझौता दुनिया के कुल व्यापार के लगभग एक-तिहाई (1/3) हिस्से को प्रभावित करेगा, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में भारी उछाल आने की उम्मीद है।