केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद के एक कार्यक्रम में अपने राजनीतिक सफर, गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी, कोरोना काल के 'जनता कर्फ्यू' और भारत की वैक्सीन सफलता पर विस्तार से बात की।

अहमदाबाद में आयोजित एक हालिया कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने राजनीतिक जीवन, प्रशासनिक अनुभवों और देश के महत्वपूर्ण दौरों पर खुलकर बात की। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि उन्हें अपने राजनीतिक सफर में हमेशा गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी ही मिली है, जिससे आंदोलनों और सुरक्षा चुनौतियों से निपटना उनकी नियति बन गया है। इसके अलावा, उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान देश की एकजुटता, पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और भारत द्वारा विकसित कोविड वैक्सीन की वैश्विक सफलता का भी विशेष रूप से जिक्र किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन के दौरान अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि जब भी उन्हें राज्य या केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई, उन्हें हमेशा गृह मंत्रालय ही मिला। उन्होंने चुटीले अंदाज में कहा कि उनके भाग्य में ही आंदोलनों, असामाजिक तत्वों और आतंकवाद से निपटना लिखा है। उन्होंने अहमदाबाद शहर का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कभी सुरक्षा कारणों से शहर में कर्फ्यू लगाना पड़ता था, तब स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन को कितनी बड़ी प्रशासनिक मशक्कत करनी पड़ती थी। शहर में कम से कम 300 पुलिस वाहनों पर माइक के जरिए नागरिकों को सूचना देनी पड़ती थी ताकि कानून व्यवस्था पूरी तरह से सुचारू बनी रहे।
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर को याद किया। उन्होंने बताया कि जब देश में कोरोना से पहली दो मौतें हुईं और पुणे की लैब ने इसकी पुष्टि की, तो यह चिंता का विषय बन गया था कि यह बीमारी तेजी से फैलेगी। जब उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी चिंता व्यक्त की, तो पीएम ने कहा कि केवल चिंता करने से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि इसके उपाय सोचने होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के सुझाव पर देश में 'जनता कर्फ्यू' का प्रयोग करने का निर्णय लिया गया। शुरुआत में गृह मंत्री को संदेह था कि कानूनी आदेशों के बिना केवल जनता से आग्रह करने वाला यह प्रयोग विफल हो सकता है, क्योंकि लोग आमतौर पर पाबंदियों के बावजूद बाहर निकल जाते हैं। हालांकि, अगले दिन सुबह आठ बजे से जो परिणाम सामने आए, उसने सभी को हैरान कर दिया। पूरे देश की सड़कें पूरी तरह सुनसान थीं और एक भी व्यक्ति बाहर नहीं निकला। इस अभूतपूर्व जनसहयोग को देखकर प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी टीम से कहा था कि यदि देश की जनता खुद इस आपदा से लड़ने के लिए तैयार है, तो हमें जीतने से कोई नहीं रोक सकता। महामारी के समाप्त होने के बाद जब विश्लेषण किया गया, तो यह स्पष्ट हुआ कि इस सामूहिक अनुशासन ने देश को कितनी बड़ी आपदा से बचाया।
अपने संबोधन के अंत में केंद्रीय गृह मंत्री ने भारत की वैज्ञानिक उपलब्धि और कोविड वैक्सीन के विकास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने ऐतिहासिक तुलना करते हुए बताया कि अतीत में पश्चिमी देशों में बनने वाली कई महत्वपूर्ण वैक्सीन्स भारत तक पहुंचने में 23 से 42 साल तक का लंबा समय ले लेती थीं, तब तक देश के नागरिकों को उनकी आवश्यकता भी समाप्त हो चुकी होती थी। इसके विपरीत, कोरोना महामारी के संकट काल में भारत दुनिया के सबसे पहले वैक्सीन बनाने वाले तीन अग्रणी देशों में शामिल रहा। भारत ने न केवल अपनी विशाल आबादी का सफलतापूर्वक टीकाकरण किया, बल्कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना के तहत दुनिया के 70 से अधिक देशों को वैक्सीन भेजकर करोड़ों लोगों की जान बचाने का सराहनीय कार्य भी किया।

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