मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से 26 बच्चों की मौत के मामले में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी की हाईकोर्ट में जमानत टली। सरकार ने ड्रग कंट्रोलर पर कार्रवाई की, और अनियमितताओं के चलते 'अपना मेडिकल स्टोर्स' का ड्रग लाइसेंस भी तत्काल प्रभाव से निरस्त किया गया।

जबलपुर. स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से छिंदवाड़ा और बैतूल में अब तक 26 मासूमों की मौत के गंभीर मामले में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण अपडेट आया। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई, क्योंकि उनका केस बेंच में सूचीबद्ध नहीं हो सका। बच्चों को कथित रूप से यह घातक कफ सिरप लिखने के आरोप में डॉ. सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इससे पहले, निचली अदालत (लोअर कोर्ट) ने भी उनकी जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था।
इस गंभीर घटना के बाद सरकार ने तत्काल प्रभाव से कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश के ड्रग कंट्रोलर सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने मामले की तह तक जाते हुए डॉ. प्रवीण सोनी और तमिलनाडु की दवा कंपनी श्रीसन फार्मास्यूटिकल के संचालक के खिलाफ भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। डॉ. सोनी को राजपाल चौक से गिरफ्तार किया गया था, और अदालत ने जमानत खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
औषधि प्रशासन विभाग ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए परासिया स्थित मेसर्स अपना मेडिकल स्टोर्स का ड्रग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमावली, 1945 के नियम 66(1) के तहत की गई है।
जांच में मिली गंभीर अनियमितताएं:
रिकॉर्ड में कमी: 3 अक्टूबर को हुई जांच में पाया गया कि बच्चों की मौत से जुड़ी संदिग्ध सिरप की बिक्री का रिकॉर्ड अधूरा और अस्पष्ट था। यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि दवा की खेप कब, कहां से आई और किसे बेची गई।
फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति: दवाओं का विक्रय रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की गैर-मौजूदगी में किया जा रहा था, जो कि औषधि अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।
दस्तावेज पेश करने में विफलता: जांच टीम द्वारा बिक्री के बिल और अन्य आवश्यक दस्तावेज मांगे जाने पर भी प्रतिष्ठान कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका।

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