Diwali 2026 Full Dates List: वर्ष 2026 में दिवाली कब है? जानें धनतेरस, नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज की सटीक तिथियां और इस 5 दिवसीय दीपोत्सव का धार्मिक महत्व।

धम डेस्क। स्टार समाचार वेब
सनातन धर्म में दिवाली (दीपोत्सव) का त्योहार सबसे बड़े और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक माना जाता है। अंधकार पर प्रकाश और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक यह त्योहार पूरे देश में बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में दीपोत्सव का यह पावन पर्व नवंबर के महीने में मनाया जाएगा।
पांच दिनों तक चलने वाले इस महापर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है और इसका समापन भाई दूज के साथ होता है। इन पांच दिनों के दौरान घरों को दीयों की रोशनी से सजाया जाता है, बाजारों में खरीदारी की चहल-पहल रहती है और मंदिरों से लेकर घरों तक मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, भगवान धन्वंतरि और श्री कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यदि आप भी वर्ष 2026 की दिवाली की तैयारियों और पूजा की तिथियों को लेकर योजना बना रहे हैं, तो यहाँ धनतेरस से लेकर भाई दूज तक की पूरी तिथि सूची और उनका महत्व विस्तार से दिया गया है।
दीपोत्सव के पहले दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाने का विधान है। इस साल धनतेरस 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
धार्मिक महत्व और पूजा: इस शुभ दिन पर आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि, धन की देवी मां लक्ष्मी और धन के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर देव की पूजा की जाती है।
खरीदारी की परंपरा: धनतेरस के दिन सोना, चांदी, नए बर्तन, वाहन और गृहोपयोगी सामान खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और आरोग्य लाती हैं।
यम दीपदान: धनतेरस की शाम को घर के मुख्य द्वार के बाहर यमराज के निमित्त चौमुखी दीपक (यम दीप) जलाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्यों पर से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
दीपोत्सव का दूसरा दिन नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली के रूप में जाना जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 7 नवंबर 2026, शनिवार को मनाया जाएगा।
धार्मिक कथा और महत्व: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि को भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी असुर नरकासुर का वध करके 16,100 कन्याओं को उसकी कैद से मुक्त कराया था। इसी खुशी में नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है।
परंपराएं: इस दिन सुबह शरीर पर उबटन लगाकर स्नान करने (अभ्यंग स्नान) की परंपरा है, जिससे सौंदर्य और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। शाम के समय घरों में दीपक जलाकर सजावट की जाती है और मुख्य दिवाली की तैयारियां पूरी की जाती हैं।
दीपोत्सव का सबसे मुख्य और महत्वपूर्ण दिन दिवाली का होता है। यह पर्व कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में दिवाली 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी।
लक्ष्मी-गणेश पूजन का महत्व: दिवाली की शाम और प्रदोष काल के दौरान धन की देवी मां लक्ष्मी और बुद्धि-विवेक के दाता भगवान गणेश जी की विधिवत पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों के घरों में वास करती हैं।
उत्सव और परंपराएं: इस दिन घरों के बाहर रंगोली सजाई जाती है, पूरे घर को दीयों और झिलमिलाती लाइटों से रोशन किया जाता है। लोग एक-दूसरे को मिठाइयां और उपहार देकर दिवाली की शुभकामनाएं देते हैं।
दिवाली के अगले चरण में गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी।
धार्मिक कथा और महत्व: द्वापर युग में ब्रजवासियों को देवराज इंद्र के मूसलाधार प्रकोप से बचाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने अपनी कनिष्ठ उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत उठा लिया था। तभी से गोवर्धन पूजा और प्रकृति की रक्षा के प्रतीक के रूप में यह पर्व मनाया जाता है।
पूजा विधि: इस दिन घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत और भगवान गोवर्धन की आकृति बनाकर पूजा की जाती है। इस दिन भगवान को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है, जिसे 'अन्नकूट' (Annakut) कहा जाता है।
पाँच दिवसीय दीपोत्सव का समापन भाई दूज (यम द्वितीया) के पवित्र त्योहार के साथ होता है। वर्ष 2026 में भाई दूज 11 नवंबर 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।
धार्मिक महत्व: भाई दूज का पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के बुलावे पर उनके घर गए थे, जहाँ यमुना ने उनका आदर-सत्कार कर तिलक लगाया था।
परंपरा: इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। भाई अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं और उन्हें सुंदर उपहार देते हैं।
नवंबर 2026 में आने वाला यह पांच दिवसीय दीपोत्सव जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और अपनों के साथ आनंद के पल लेकर आता है।
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