केंद्र सरकार ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में बदलाव कर 100% इथेनॉल (E100) फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को मंजूरी दी है। जानिए इसके नियम, लाभ और मौजूदा वाहन चालकों पर इसका क्या असर होगा।

केंद्र सरकार ने देश में हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 100% इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल यानी E100 से चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए आधिकारिक नियमों को मंजूरी दे दी है। इसके लिए सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। यह नीतिगत बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब देश की कई प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां अपनी नई फ्लेक्स-फ्यूल कारों को बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। इस नए नोटिफिकेशन के बाद भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है।
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, मोटर व्हीकल्स रूल्स में किए गए नए संशोधनों के तहत एमिशन प्रोविजन में E85 फ्यूल के साथ-साथ E100 फ्यूल को भी आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि E85 और E100 जैसे उच्च मिश्रण वाले ईंधनों का उपयोग केवल उन्हीं विशेष वाहनों में किया जा सकेगा जो इसके लिए विशेष रूप से डिजाइन, इंजीनियर और प्रमाणित किए गए हों। देश की आम और पारंपरिक सड़कों पर चलने वाली सामान्य गाड़ियों में इस ईंधन का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा।
आम जनता और मौजूदा कार मालिकों के मन में उठने वाले सवालों को शांत करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान वाहन चालकों को किसी भी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। जो गाड़ियां वर्तमान में सामान्य पेट्रोल या E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) ईंधन पर चल रही हैं, वे E85 या E100 ईंधन पर नहीं चलाई जा सकती हैं। इस नए नोटिफिकेशन के कारण मौजूदा वाहन मालिकों को अपनी कारों में किसी भी प्रकार के मॉडिफिकेशन या बदलाव कराने की कोई जरूरत नहीं होगी। यह व्यवस्था पूरी तरह से एक वैकल्पिक और भविष्य की तकनीक के रूप में लाई गई है।
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों में सफलतापूर्वक बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक से लैस गाड़ियां विशेष रूप से डिजाइन की जाती हैं, जो एक ही फ्यूल टैंक के भीतर पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग अनुपातों (रेश्यो) पर आसानी से बिना किसी बाधा के चल सकती हैं। वाहन की इंजीनियरिंग और उसके आधिकारिक सर्टिफाइड डिजाइन के आधार पर इथेनॉल और पेट्रोल के मिश्रण की यह सीमा E85 से लेकर सीधे 100% शुद्ध E100 तक हो सकती है।
पारंपरिक फॉसिल फ्यूल यानी पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल का कार्बन फुटप्रिंट काफी कम होता है, जिससे यह पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल है। इथेनॉल के उच्च मिश्रण के उपयोग से गाड़ियों के एग्जॉस्ट से निकलने वाली खतरनाक कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और अन्य हाइड्रोकार्बन गैसों के उत्सर्जन को काफी हद तक घटाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, देश में इथेनॉल का उत्पादन और उपयोग बढ़ने से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के भारी-भरकम आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की भी बड़ी बचत होगी।
E100 का सीधा मतलब 100 प्रतिशत शुद्ध इथेनॉल फ्यूल से है। इथेनॉल मुख्य रूप से जैव स्रोतों जैसे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उपजों से तैयार किया जाने वाला एक पर्यावरण-अनुकूल बायोफ्यूल है। अधिकारियों के मुताबिक, E85 और E100 जैसे उच्च ग्रेड के ईंधन केवल उन्हीं नई गाड़ियों के लिए होंगे जिन्हें मूल उपकरण निर्माताओं यानी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEM) द्वारा विशेष रूप से इस तकनीक के अनुरूप डिजाइन और सर्टिफाइड किया जाएगा। पुरानी या सामान्य E20 गाड़ियों में इनका उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी।

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