यूक्रेनी ड्रोन हमलों से रूसी रिफाइनरियों को हुए नुकसान के बाद भारत रूस को पेट्रोल का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन गया है। जानें अगस्त में भारत से कितनी पेट्रोल सप्लाई हुई और इसके पीछे की पूरी रिपोर्ट।

यूक्रेनी ड्रोन हमलों के चलते रूस को अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत जैसे देशों का रुख करना पड़ा है। इस बीच, भारत रूस के लिए पेट्रोल के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया है। शिप-ट्रैकिंग आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त महीने में रूस के समुद्री रास्ते से पेट्रोल आयात में ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया है।
रूस दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल उत्पादकों और निर्यातकों में शुमार है, लेकिन यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने उसकी घरेलू रिफाइनिंग क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऊर्जा विश्लेषण कंपनी 'वॉर्टेक्सा' के अनुसार, जुलाई और अगस्त के दौरान रूस की रिफाइनरियों पर करीब 32 हमले हुए, यानी औसतन हर दूसरे दिन एक हमला किया गया। इन लगातार हमलों के कारण रूस का घरेलू पेट्रोल उत्पादन कुछ समय के लिए 70 प्रतिशत तक घट गया। इसके चलते देश के भीतर ईंधन की भारी किल्लत पैदा हो गई और मॉस्को को अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए विदेशों से पेट्रोल आयात करने पर मजबूर होना पड़ा। स्थिति को संभालने के लिए रूस ने पेट्रोल बिक्री पर कुछ कड़े प्रतिबंध भी लागू किए हैं।
ऊर्जा विश्लेषण कंपनी वॉर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के महीने में रूस ने समुद्र के रास्ते लगभग 1.25 लाख बैरल प्रतिदिन की दर से पेट्रोल आयात किया। अगर पूरे महीने की कुल मात्रा की बात करें, तो यह करीब 4.70 लाख टन बैठती है। व्यापारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले दो महीनों में भारतीय रिफाइनरों ने रूस को लगभग 10 लाख बैरल पेट्रोल की आपूर्ति की है। इस पूरी सप्लाई चेन में सबसे अहम भूमिका गुजरात की 'वाडिनार रिफाइनरी' ने निभाई है, जिसका संचालन नायरा एनर्जी करती है। इस कंपनी में रूस की दिग्गज कंपनी रोसनेफ्ट की लगभग आधी हिस्सेदारी है।
वर्ष 2022 के भू-राजनीतिक बदलावों के बाद से भारत ने रूस से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की खरीद में भारी बढ़ोतरी की है। आज रूस भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे प्रमुख स्रोत बन गया है, जिसे रिफाइन करके पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन तैयार किए जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, जून और जुलाई के दौरान भारत ने रूस से प्रतिदिन 26 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल खरीदा, जो फरवरी के लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन की तुलना में काफी ज्यादा है। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से अधिक हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस को भारत द्वारा भेजा गया कुछ पेट्रोल असल में रूसी कच्चे तेल से ही रिफाइन करके तैयार किया गया है।
घरेलू उत्पादन और मांग के बीच पैदा हुए भारी अंतर के कारण रूस को वैश्विक बाजार से ईंधन खरीदना पड़ रहा है। अगस्त के महीने में भारत के अलावा तुर्किये और मोरक्को जैसे देशों ने भी रूस को पेट्रोल की आपूर्ति की है। मांग और आपूर्ति के संतुलन को बनाए रखने के लिए रूस ने जुलाई में अपने पेट्रोल के पूर्ण निर्यात प्रतिबंध को जनवरी 2027 के अंत तक बढ़ा दिया था। वहीं, डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध 1 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया था। वॉर्टेक्सा के मुताबिक, अगस्त में रूस के कुल पेट्रोल आयात का लगभग 55 फीसदी हिस्सा (करीब 2.60 लाख टन) प्रतिबंधों के दायरे वाले जहाजों के जरिए रूस पहुंचा, जिसमें भूमध्यसागर में किए गए शिप-टू-शिप ट्रांसफर की बड़ी भूमिका रही।

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