दावोस में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भारत पर लगे 25% टैरिफ को हटाने के संकेत दिए हैं। जानें रूसी तेल विवाद, 500% ड्यूटी की धमकी और भारत की 'इंडिया फर्स्ट' ऊर्जा नीति पर इसका असर।

दावोस। स्टार समाचार वेब
वैश्विक राजनीति और ऊर्जा कूटनीति के बीच भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि भारत पर रूसी कच्चे तेल की खरीद के कारण लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटाया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए अमेरिका ने एक 'शर्त' भी रखी है।
मीडिया संस्थान 'पोलिटिको' से बात करते हुए बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ के दबाव के कारण भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी तेल की खरीद में काफी कमी आई है, जिसे अमेरिका अपनी जीत मान रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टैरिफ हटाने का रास्ता खुला है, बशर्ते भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति रणनीति (Energy Supply Strategy) में बदलाव करे और रूस पर निर्भरता कम करे।
एक तरफ राहत की बात है, तो दूसरी तरफ दबाव भी। अमेरिकी संसद में एक प्रस्तावित बिल चर्चा में है, जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक की भारी ड्यूटी लगाने का प्रावधान है। इस पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि "भारत की प्राथमिकता अपने 140 करोड़ नागरिकों को सस्ती और सुलभ ऊर्जा सुनिश्चित करना है। हमारी नीति 'इंडिया फर्स्ट' पर आधारित है।"
दिलचस्प बात यह है कि बेसेंट ने इस विवाद में यूरोपीय देशों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यूरोप, भारत से रिफाइंड तेल खरीदकर परोक्ष रूप से रूस की युद्ध मशीनरी को फंड कर रहा है। उन्होंने इसे 'विडंबना और मूर्खता' करार दिया, क्योंकि रूसी कच्चा तेल भारत में रिफाइन होकर अंततः यूरोपीय बाजारों में ही खप रहा है।
इन सबके बीच भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बातचीत तेज है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा है। 2 अरब की आबादी और वैश्विक GDP के 25% हिस्से को कवर करने वाला यह समझौता यह सुनिश्चित करता है कि यूरोप फिलहाल भारत से अपने व्यापारिक रिश्ते बिगाड़ने के पक्ष में नहीं है।
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