भारत के पड़ोसी देशों में स्थित प्रमुख शक्तिपीठों के बारे में जानें। श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान, तिब्बत और बांग्लादेश के इन पवित्र देवी मंदिरों का पौराणिक महत्व और इतिहास पढ़ें

भारत के बाहर स्थित प्रमुख शक्तिपीठ
धर्म डेस्क। स्टार समाचार वेब
शक्तिपीठों की परंपरा सनातन धर्म में बेहद गहरी और पवित्र मानी जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सती के अंग जहां-जहां गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुए। भारत के अलावा कई प्रमुख शक्तिपीठ हमारे पड़ोसी देशों में भी स्थित हैं, जिनकी अपनी एक अलग पौराणिक मान्यता और गहरी आस्था है। आइए जानते हैं भारत के बाहर स्थित इन प्रमुख शक्तिपीठों के बारे में विस्तार से।
1. श्रीलंका: इंद्राक्षी शक्तिपीठ

श्रीलंका में स्थित इंद्राक्षी शक्तिपीठ देवी उपासना के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्रों में से एक है।
पौराणिक मान्यता: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र स्थान पर माता सती की पायल गिरी थी।
विशेषता: ऐसी भी मान्यता है कि देवराज इंद्र और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने यहां देवी की आराधना की थी। कठिन परिस्थितियों और समुद्र पार स्थित होने के बावजूद यह स्थान हिंदू श्रद्धालुओं के लिए अत्यधिक श्रद्धा का केंद्र है।
2. पाकिस्तान: हिंगुला शक्तिपीठ (हिंगलाज माता)

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के एक बेहद दुर्गम क्षेत्र में स्थित हिंगुला शक्तिपीठ को 'हिंगलाज माता मंदिर' के नाम से भी पूरी दुनिया में जाना जाता है।
माता का अंग: पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां माता सती का सिर गिरा था।
लोकप्रियता: इसे स्थानीय स्तर पर 'नानी का मंदिर' और 'नानी का हज' भी कहा जाता है। दुर्गम भौगोलिक स्थिति और रेगिस्तानी रास्ता होने के बावजूद, यहां मां के दर्शन के लिए भक्तों की अटूट आस्था बनी रहती है।
3. तिब्बत: मानसरोवर शक्तिपीठ

पवित्र कैलाश-मानसरोवर का क्षेत्र भगवान शिव और माता शक्ति की क्रीड़ा स्थली माना जाता है।
मान्यता: तिब्बत क्षेत्र में स्थित इस पावन स्थल पर माता सती की दाहिनी हथेली गिरने की मान्यता है।
महत्व: यह क्षेत्र हिंदू तीर्थ परंपरा में अत्यंत विशेष स्थान रखता है। यहाँ की यात्रा शारीरिक रूप से बेहद कठिन होती है, फिर भी आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की चाह में श्रद्धालु यहां खींचे चले आते हैं।
4. नेपाल के प्रमुख शक्तिपीठ
पड़ोसी देश नेपाल में माता शक्ति से जुड़े कई प्रसिद्ध और जागृत मंदिर मौजूद हैं, जिनमें से तीन प्रमुख शक्तिपीठों का विशेष महत्व है:

गंडकी शक्तिपीठ: नेपाल में गंडक नदी के पास स्थित इस पीठ को लेकर मान्यता है कि यहां माता सती का बायां गाल गिरा था। यहां देवी को 'गंडकी' स्वरूप में पूजा जाता है।
गुह्येश्वरी शक्तिपीठ: काठमांडू में पशुपतिनाथ मंदिर के निकट बागमती नदी के तट पर स्थित यह मंदिर देवी उपासना का एक प्रमुख केंद्र है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां माता सती के घुटने या शरीर के अन्य अंग गिरे थे।
दंतकाली शक्तिपीठ: नेपाल के धरान क्षेत्र में स्थित इस मंदिर में माता सती के दांत गिरे थे, जिस कारण यहां देवी को 'दंतकाली' रूप में पूजा जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां भारी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
5. बांग्लादेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ
बांग्लादेश में भी शक्ति उपासना के कई ऐतिहासिक और चमत्कारी मंदिर स्थित हैं। यहाँ के कुछ सबसे प्रमुख शक्तिपीठ

उग्रतारा शक्तिपीठ: इस स्थान को लेकर मान्यता है कि यहां माता सती की नाक गिरी थी, जहां देवी के उग्र रूप की पूजा की जाती है।
अपर्णा शक्तिपीठ (भवानीपुर): इस पावन स्थल पर माता सती के बाएं पैर की पायल गिरने की मान्यता है। यहां देवी 'अपर्णा' रूप में पूजी जाती हैं।
श्रीशैल महालक्ष्मी शक्तिपीठ: बांग्लादेश के सिलहट क्षेत्र में स्थित इस पीठ के बारे में कहा जाता है कि यहां माता सती का गला गिरा था। यहां मां महालक्ष्मी की आराधना की जाती है।
यशोरेश्वरी और चट्टल भवानी: ये दोनों मंदिर भी बांग्लादेश की शक्ति परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। नवरात्रि और अन्य विशेष पर्वों पर यहां भव्य उत्सव मनाए जाते हैं और दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
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