मिडिल ईस्ट में युद्ध तेज: ईरान ने 10 लाख सैनिकों की लामबंदी की। अमेरिका ने 850 टॉमहॉक मिसाइलें दागीं और 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने का फैसला किया। सऊदी और कुवैत पर भी मिसाइल हमले

तेहरान/वाशिंगटन। स्टार समाचार वेब
ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग अब जमीनी हमले की आहट के साथ और अधिक हिंसक हो गई है। जहाँ ईरान ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए 10 लाख से अधिक ग्राउंड सैनिकों को तैनात करने का दावा किया है, वहीं अमेरिका भी जमीनी युद्ध के लिए एक्शन में है।
ईरान की सैन्य लामबंदी और युवाओं का जोश
ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी जमीनी हमले के खतरे को देखते हुए देश भर में 'बसीज' और 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) में शामिल होने के लिए युवाओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। ईरान का दावा है कि उसने किसी भी विदेशी घुसपैठ को रोकने के लिए 10 लाख सैनिकों की विशाल दीवार खड़ी कर दी है। युद्ध के बढ़ते खतरों के बीच ईरानी युवाओं में सेना में शामिल होने का अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन मिडिल ईस्ट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की योजना बना रहा है। इस फोर्स में मुख्य रूप से पैदल सेना (Infantry) और बख्तरबंद गाड़ियां शामिल होंगी। ये सैनिक पहले से तैनात 5,000 मरीन और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 2,000 पैराट्रूपर्स के साथ मिलकर काम करेंगे।
ईरान की IRGC ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तीन विदेशी जहाजों को चेतावनी देकर वापस लौटा दिया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका या उसके सहयोगियों के बंदरगाहों की ओर जाने वाले किसी भी जहाज के लिए यह रास्ता पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
अमेरिकी हमला: पिछले चार हफ्तों में अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर 850 से ज्यादा टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागी हैं। मिसाइलों के तेजी से खत्म होते भंडार ने पेंटागन के अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।
सऊदी अरब पर निशाना: ईरान ने सऊदी अरब के रियाद क्षेत्र की ओर 6 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, सऊदी एयर डिफेंस ने 2 मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, जबकि बाकी सुनसान इलाकों में गिरीं।
रूस का मुनाफा: विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध के कारण बढ़ी तेल की कीमतों का सबसे बड़ा फायदा रूस को हो रहा है। वह अब अपना कच्चा तेल पूरी बाजार कीमत पर बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है।
शिक्षा पर प्रहार: ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार, युद्ध में अब तक 600 से अधिक स्कूल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और 1,000 से ज्यादा छात्र-शिक्षक हताहत हुए हैं। 28 फरवरी को मिनाब के एक स्कूल पर हुए हमले में 170 मौतें हुई थीं, जिस पर UN ने न्याय की मांग की है।
28 दिनों से बंद इंटरनेट: ईरान में इंटरनेट बंदी अपने चौथे हफ्ते में प्रवेश कर गई है। 'नेटब्लॉक्स' के अनुसार, वहां केवल सरकार समर्थित लोगों को ही सीमित इंटरनेट की अनुमति है।
कुवैत पर ड्रोन हमला: कुवैत के मुबारक अल-कबीर पोर्ट को ड्रोन और क्रूज मिसाइलों से निशाना बनाया गया है, जिससे बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुँचा है।

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नेपाल के इमिग्रेशन विभाग के हालिया आंकड़ों ने वीजा नियमों के उल्लंघन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पिछले पांच वर्षों (2021-2025) में नेपाल से बाहर निकाले गए कुल 2,267 विदेशी नागरिकों में 30.65 प्रतिशत से अधिक अकेले चीन के थे। इस सूची में चीन के बाद अमेरिका और बांग्लादेश का स्थान रहा।
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