पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। ईरान और इस्राइल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध अब 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है। जहाँ बगदाद में अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया गया है, वहीं ईरान के खार्ग द्वीप पर भीषण बमबारी हुई है।
By: Ajay Tiwari
Mar 14, 20264:26 PM
पश्चिम एशिया में संघर्ष की आग अब एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले चुकी है। शनिवार, 14 मार्च 2026 को इस भीषण टकराव का 15वां दिन है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख और ईरान के 'पलटवार' की नीति ने वैश्विक राजनीति में अस्थिरता पैदा कर दी है।
ईरान के खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने आधिकारिक घोषणा करते हुए 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' की 46वीं लहर शुरू कर दी है। प्रवक्ता एब्राहीम जोल्फाघरी ने टीवी पर चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका और इस्राइल को बहाए गए खून की कीमत चुकानी होगी। ईरान ने दावा किया है कि उसने फिरोजाबाद और बंदर अब्बास के ऊपर दो अमेरिकी MQ-9 ड्रोन और तब्रिज में एक अन्य ड्रोन को मार गिराया है। ईरान के अनुसार अब तक कुल 112 विदेशी लड़ाकू विमान और सुसाइड ड्रोन नष्ट किए जा चुके हैं।
इराक की राजधानी बगदाद में स्थित दुनिया के सबसे सुरक्षित राजनयिक परिसरों में से एक, अमेरिकी दूतावास पर शनिवार सुबह मिसाइल हमला हुआ। मिसाइल सीधे दूतावास के हेलिपैड पर गिरी, जिससे परिसर से धुएं का गुबार उठता देखा गया। इराकी सुरक्षा अधिकारियों ने हमले की पुष्टि की है, हालांकि अभी तक किसी के हताहत होने की आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप पर 15 से अधिक जोरदार धमाके सुने गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी हमलों ने द्वीप के सैन्य ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है। इसके विपरीत, ईरानी मीडिया का कहना है कि उनकी रक्षा प्रणाली हमले के एक घंटे के भीतर फिर से सक्रिय हो गई और तेल बुनियादी ढांचे (Oil Infrastructure) को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है।
इस्राइली वायुसेना ने दक्षिणी लेबनान में हमले तेज कर दिए हैं। तआमीर हरेट सैदा में हुए हमले में 4 नागरिकों की मौत हो गई। एक संयुक्त मेडिकल पॉइंट पर हुए हमले में 2 स्वास्थ्यकर्मियों की जान चली गई और 5 अन्य घायल हो गए। लेबनान सरकार ने इसे 'अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून' का खुला उल्लंघन करार दिया है।
भारत सरकार बदलती परिस्थितियों पर बारीकी से नजर रखे हुए है। कोच्चि बंदरगाह पर 4 मार्च से खड़े ईरानी युद्धपोत 'आईआरआईएस लवान' (IRIS Lavan) के 183 सदस्यों में से 50 को छोड़कर, बाकी सभी गैर-जरूरी क्रू को तुर्की एयरलाइंस के माध्यम से ईरान वापस भेज दिया गया है। भारत ने यह कदम सुरक्षा और प्रोटोकॉल के तहत उठाया है।