रीवा से गुजरने वाले तीन राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण में करीब 8 हजार पुराने पेड़ काटे गए। एजेंसियों ने 10 गुना पौधे लगाने का दावा किया लेकिन मौके पर पौधे नदारद हैं। आरटीआई से फर्जीवाड़ा उजागर हुआ और पीएम-सीएम से शिकायत की गई है।

रीवा, स्टार समाचार वेब
पौधरोपण भी खेल बन गया है। रीवा से होकर गुजरने वाली तीन नेशनल हाइवे के चौड़ीकरण में कुल 8 हजार के करीब सालों पुराने पेड़ काटे गए। इन पेड़ों की तुलना में 10 गुना पौधे लगाने थे। निर्माण एजेंसियों ने कागजों में पौधे लगाए। अब वह दिख नहीं रहे। इसका खुलासा आरटीआई से हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता ने इस फर्जीवाड़ा की शिकायत पीएम, सीएम से की है।
ज्ञात हो कि रीवा में पौधरोपण का मुद्दा नया नहीं है। यहां सालों से पौधरोपण अभियान चल रहा है। लाखों पौधे रीवा को ग्रीन बनाने के लिए लगा दिए गए लेकिन वह पौधे अब भी लोगों को नजर नहीं आ रहे हैं। यही खेल बायपास और नेशनल हाइवे में पौधरोपण में भी किया गया। नेशनल हाइवे का चौड़ीकरण किया गया। फोरलेन सड़क बनाई गई। रीवा हनुमना, मनगवां से चाकघाट और रीवा से स्लीमनाबाद नेशनल हाइवे का निर्माण किया गया। इस निर्माण के चक्कर में सड़क के किनारे लगे हजारों पेड़ों की बली ले ली गई। रीवा में पहले रीवा से हनुमना और मनगवां से चाकघाट सड़क का काम एमपीआरडीसी ने कराया। इसके बाद एनएचएआई को हैंडओव्हर कर दिया। एमपीआरडीसी के समय जो पेड़ काटे गए थे। वह भी गायब हो गए। अब जब काटे गए पेड़ों की भरपाई करने की बारी आई तो किसी भी एजेंसी ने मापदंड पूरे नहीं किए। काटे गए पेड़ों की तुलना में एजेंसियों को 10 गुना पौधे लगाने थे। मौके पर पेड़, पौधे नजर ही नहीं आते। मनगवां से चाकघाट और रीवा से हनुमना तक दोनों तरफ कहीं भी पेड़ नहीं हैं। फिर भी कागजों में पेड़ लगा दिए गए हैं। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में एनएचएआई ने लाखों पेड़ लगाने का दावा किया गया है। वहीं बंसल और विंध्याचल एक्सप्रेस वे ने भी हजारों पेड़ सड़कों के किनारे मौजूदगी का दावा किया है लेकिन मौके पर हकीकत कुछ और ही सामने आती हैं। कहीं भी पौधे नजर नहीं आते। सालों पहले सड़क बन गई। टोल वसूली भी हुई अब तक लगाए गए पेड़ बड़े नहीं हो पाए हैं। आरटीआई की जानकारी सामने आने के बाद अब आरटीआई कार्यकर्ता ने इसकी शिकायत पीएम और सीएम से की है।
पीएम और सीएम से की गई है मामले की शिकायत
आरटीआई कार्यकर्ता पीयूष त्रिपाठी, संजय सिंह बघेल, डॉ विवेक पाण्डेय ने इसकी शिकायत पीएम और सीएम से की है। शिकायत कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। पौधरोपण में अनियमितता का हवाला दिया गया है। पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच करने और दोषियों को दंडित करने की मांग की गई है। आरटीआई कार्यकर्ताओं ने शिकायत में कहा है कि यदि पौधे लगाए गए हैं कि तो उनका भौतिक परीक्षण कराया जाए। स्वतंत्र जांच समिति बनाई जाए। उसी जांच समिति से इसकी जांच कराई जाए। आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीएम भोपाल से एक पत्र प्रशासन के पास जांच के लिए पहुंच गया है। अभी तक उस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
किसने कितने पेड़ काटे और लगाए
रीवा से चाकघाट मार्ग एनएच 30
एनएचएआई ने आरटीआई के तहत जानकारी दी है कि वर्ष 2017 से 2022 के बीच एनएच 30 के निर्माण के दौरान कुल 1824 पेड़ काटे गए। इस अवधि में पर्यावरणीय संतुलन के लिए कुल 1 लाख 68 हजार 998 पौधे लगाए गए। इसमें 71 हजार 801 पौधे मप्र में और 97 हजार 192 पौधे एनएच 30 पर लगाए गए।
रीवा स्लीमनाबाद
एनएचएआई ने आरटीआई के तहत बताया है कि 2.79 लाख रुपए पौध रोपण पर खर्च किए गए। 1.65 लाख पौधे लगाने का दावा किया गया। इसमें 1.44 लाख पौधे जीवित होने की बात एनएचएआई कह रहा है।
एनएच 30 मनगवां से चाकघाट
एमपीआरडीसी से आरटीआई के तहत जानकारी चाही गई थी। इसमें बंसल पाथवेस ने जानकारी दी है कि मनगवां से चाकघाट एनएच 30 इस खंड में कुल 2448 पेड़ काटे गए। वर्तमान में 28 हजार पेड़ उपलब्ध बताए जा रहे हैं।
रीवा हनुमना नेशनल हाइवे 30
एमपीआरडीसी रीवा से आरटीआई के तहत जानकारी चाही गई थी। इसमकें विंध्यांचल एक्सप्रेस वे प्राइवेट लिमिटेड ने जानकारी दी है कि रीवा से हनुमना एनएच 30/135 के इस खंड में कुल 3550 पेड़ काटे गए। 42 हजार 435 पौधे हैं।

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