मैहर में वित्तीय अनियमितता पर प्राचार्यों के निलंबन की कार्रवाई तेज, जबकि रीवा में 28 लाख के घोटाले पर अब तक कोई ठोस एक्शन नहीं।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
मैहर में लाखों रुपए की वित्तीय अनियमितता की गई। इस मामले में मैहर कलेक्टर ने जांच कराई और जांच प्रतिवेदन के आधार पर अब धड़ाधड़ कार्रवाई हो रही है। जेडी ने 6 प्राचार्याें को निलंबित कर दिया। वहीं कमिश्नर ने दे से ही सही 7 प्राचार्र्यों के निलंबन आदेश जारी कर दिए लेकिन रीवा में हुए 28 लाख के घोटाले में किसी तरह का एक्शन नहीं लिया जा रहा है। जांच प्रतिवेदन में डीईओ सहित एपीसी, रमसा प्रभारी और लेखा अधिकारी दोषी पाए गए हैं। तीन प्राचार्य की भी संलिप्तता मिली है। जांच प्रतिवेदन कमिश्नर को भेज दिया गया लेकिन एक्शन नहीं हुआ।
आपको बता दें कि मैहर जिला में स्कूलों को लघु निर्माण कार्य, पार्किंग शेड एवं साइकिल स्टैण्ड के निर्माण के लिए करोड़ों रुपए की राशि स्कूलों को मिली थी। स्कूलों में कार्य कराने के बाद राशि भुगतान की जिम्मेदारी स्कूलों के एसएमडीसी को प्रदान की गई थी। इसमें प्राचार्यों ने बिना काम के ही ठेका कंपनियों को लाखों रुपए का नियम विरुद्ध भुगतान कर दिया। इस मामले में मैहर कलेक्टर ने जांच कमेटी गठित की थी। जांच में कई प्राचार्य और बीईओ की संलिप्तता मिली। जांच प्रतिवेदन पर कार्रवाई के लिए सीईओ जिला पंचायत, डीईओ, जेडी लोक शिक्षण रीवा और कमिश्नर के पास फाइलें भेजी गर्इं। सबसे पहले रामनगर बीईओ पर गाज गिरी। इसके बाद जेडी ने 6 प्राचार्यों को निलंबित किया। कई दिनों से कार्रवाई की फाइल कमिश्नर रीवा संभाग के पास लंबित रही। कमिश्नर ने भी अंतत: 7 प्राचार्यों को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। रीवा को छोड़ कर सतना और मैहर में धड़ाधड़ कार्रवाईयां हो रही हैं लेकिन यहां के अधिकारियों और प्राचार्यों पर किसी तरह का एक्शन नहीं लिया जा रहा है।
कमिश्नर ने 6 प्राचार्यों को किया निलंबित
कमिश्नर रीवा संभाग रीवा बीएस जामोद ने मैहर में किए गए वित्तीय अनियमितता मामले में 6 प्राचार्यों को निलंबित किया है। इसमें शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुलवार गुजारा विकासखंड रामनगर के प्राचार्य शिवलाल वैस, हर्रई शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के सियंबर सिंह, लक्ष्मण प्रसाद शुक्ला प्रभारी प्राचार्य शाउमावि देवदहा, श्रवण सिंह, प्राचार्य शाउमावि कंदवारी, रामलखन रावत प्राचार्य शाउमावि देवराजनगर, मथुरा प्रसाद वर्मा प्राचार्य शासकीय हाई स्कूल गोविंदपुर को निलंबित किया गया है।
किस पर कितनी राशि के वित्तीय अनियमितता का आरोप
जिन प्राचार्यों को निलंबित किया गया है। उन पर लाखों रुपए के वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा है। जाचं में इसकी पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की गई है। मथुरा प्रसाद ने 23 लाख 40 हजार,प्राचार्य गुलजार सिंह न 24 लाख 94 हजार 490 रुपए, रामलखन रावत प्रभारी प्राचार्य ने 24 लाख 95 हजार, श्रवण सिंह प्राचार्य ने 23 लाख 60 हजार, लक्ष्मण प्रसाद ने 24 लाख 95 हजार, सियंब सिंह ने 22 लाख 30 हजार और शिवलाल वैस ने 24 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितता की। नियमों का पालन किया बिना ही बिना कार्य के ठेका कंपनियों को भुगतान कर दिय गया था। इसी मामले में मैहर कलेक्टर ने जांच कराई थी।
28 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितता की गई
रीवा में भी स्कूलों की मरम्मत, पुताई के लिए 50 लाख रुपए की राशि अनुरक्षण मद में आई थी। इसके अलावा एक्सीलेंस स्कूल के लिए अलग से 5 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे। इन राशि से हाई और हायर सेकेण्डरी स्कूलों में रंगाई, पुताई और मरम्मत का काम किया जाना था। इस राशि का प्राचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों और लेखाअधिकारियों ने ठेकेदार के साथ मिलकर बंदरबांट कर लिया। फर्जी बिल से राशि का भुगतान कर दिया गया। तीन प्राचार्यों ने काम अधूरा होने पर भी कार्य पूर्णता का प्रमाण पत्र दे दिया। जांच में सभी फंस रहे हैं। जेडी ने जांच कराने के बाद प्रतिवेदन कमिश्नर के पास भेज दिया है। अब तक इस पर कोई एक्शन नहीं हुुआ है।
इनकी मिली है संलिप्तता
इस पूरे फर्जीवाड़ा में डीईओ रामराज मिश्रा, तत्कालीन रमसा प्रभारी नवीन श्रीवास्तव, एपीसी सुधाकर तिवारी, लेखाअधिकारी और वर्तमान में सहायक संचालक कोष एवं लेखा पुष्पा पुसाम की भूमिका संदिग्ध रही। इनके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव कमिश्नर के पास भेजा गया है। इसके अलावा गुढ़ पीएमश्री स्कूल, खैरा स्कूल और दुआरी स्कूल प्राचार्य के खिलाफ भी प्रस्ताव कार्रवाई के लिए भेजा गया है।
सतना में भी हो चुकी है एफआईआर
रीवा जैसा फर्जीवाड़ा ठेकेदार ने सतना में भी करने की कोशिश की थी। ठेकेदार सत्यव्रत तिवारी ने बिना स्कूलों में काम कराए ही डीईओ कार्यालय में बिल लगा दिया था। जांच में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था। इसके बाद तत्कालीन डीईओ ने सिटी कोतवाली थाना में मामला दर्ज कराया था। लिपिक ने ठेकेदार के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया था। प्रकरण दर्ज होने के 24 घंटे के अंदर ठेकेदार को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।


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