रीवा में फर्नीचर फैक्ट्री पर वन विभाग की रेड और सील कार्रवाई कोर्ट में टिक नहीं पाई। अफसर मुकर गए, मामला खारिज हुआ।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
वन मंडल रीवा के अफसरों के कारनामें खत्म नहीं हो रहे हैं। अभी रेंजर का तेंदूपत्ता फर्जीवाड़ा का प्रकरण सामने ही आया था। अब नया मामला एक फर्नीचर फैक्ट्री में रेड का भी आ गया है। फर्नीचर फैक्ट्री में सुनियोजित तरीके से रेड मारी गई। दुकान को सील कर दिया गया। लाइसेंस नहीं होने पर कार्रवाई की गई थी। दुकानदार को जब विभाग से राहत नहीं मिली तो वह कोर्ट पहुंच गया। कोर्ट ने वनअफसरों को तलब किया। जवाब मांगा तो अफसर कोर्ट में कार्रवाई से ही मुकर गए। मामला तो खारिज हो गया लेकिन इनकी कारस्तानी कैमरे में कैद हो गई है।
मिली जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले वन मंडल रीवा रेंज की टीम ने रामसागर मंदिर के आगे हिरौल में संचालित एक फर्नीचर निर्माण फैक्ट्री में रेड मारी थी। रेड मारने कई वनकर्मी और साथ में रेंजर पहुंचे थे। फैक्ट्री में किसी भी तरह की लकड़ियों की चिराई आदि नहीं मिली। सिर्फ प्लाई से फर्नीचर का निर्माण होना पाया गया था। इसके अलावा फर्नीचर में लगने वाली लकड़ियां दूसरे जगहों से खरीद कर लाई जाती हैं। इसी फैक्ट्री में वन विभाग की टीम ने रेड मारी थी। दुकान का लाइसेंस मांगा था। लाइसेंस नहीं मिलने पर वन विभाग की टीम ने दुकान और फैक्ट्री को सील कर दिया था। फैक्ट्री का संचालन अवैध बताया गया था।
इस मामले में दुकानदार को काफी दिनों तक वन विभाग के कर्मचारियों, अधिकारियों ने परेशान किया था। संचालक ने सीसीएफ से भी मुलाकात की थी। वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद दुकानदार ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट में मामल पहुंचा तो वन विभाग के अधिकारियों को तलब किया गया। कोर्ट पहुंचते ही रीवा रेंजर कार्रवाई से ही मुकर गए। उन्होंने कोर्ट के सामने कहा कि किसी तरह की सील की कार्रवाई ही नहीं की गई। कोर्ट में वन विभाग के अधिकारियों के मुकरने के बाद मामला खारिज कर दिया गया और दुकान फिर से खुल गई।
लाइसेंस नहीं लगता फिर भी कार्रवाई की
फैक्ट्री संचालक लवकुश मिश्रा ने कहा कि हमारा काम लकड़ियों की कटाई नहीं है। सिर्फ फर्नीचर का निर्माण करते हैं। प्लाई का काम होता है। इसके अलावा जो बीट बगैरह लगती है वह बाहर से खरीदते हैं। इसके बाद भी पूरी टीम ने फैक्ट्री में रेड मारी थी। अधिकारी ऊपर से दबाव की बात कहते हुए कार्रवाई किए थे। कोर्ट में मामला पहुंचने पर अधिकारियों ने कहा किसी तरह की कार्रवाई ही नहीं किए हैं।
माफी मांगते फिर रहे
पहले फैक्ट्री संचालक पर वन परिक्षेत्र के अधिकारी कार्रवाई कर दबाव बना रहे थे। बाद में जब मामला कोर्ट पहुंचा और खुद फंसते नजर आए तो फैक्ट्री संचालक के आगे पीछे घूम रहे हैं। फैक्ट्री में रेड और सील की कार्रवाई का वीडियो भी सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है। पूरी रिकार्डिंग है। जिस कार्रवाई से कोर्ट में वन अधिकारियों ने इंकार किया है। वह रिकार्डिंग में है। यही वजह है कि फैक्ट्री संचालक से अब वन अफसर माफी मांगते फिर रहे हंै। कार्रवाई को गलती बता रहे हैं। इस मामले में सीसीएफ से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।


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