सतना में मानसून की पहली तेज बारिश ने स्मार्ट सिटी की तैयारियों की पोल खोल दी। कई कॉलोनियों, सड़कों और अंडरब्रिज में जलभराव हुआ, जबकि जिला अस्पताल और बस स्टैंड भी पानी से प्रभावित रहे।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेेब
मानसून की पहली ढंग की बारिश ने मंगलवार को एक ओर लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी, तो दूसरी ओर स्मार्ट सिटी की तैयारियों की हकीकत भी उजागर कर दी। करीब तीन घंटे तक हुई लगातार बारिश के बाद शहर के कई प्रमुख इलाके जलमग्न हो गए। सर्किट हाउस, बैंक कॉलोनी, भरहुत नगर, बस स्टैंड, नई बस्ती, राजेंद्र नगर, प्रेमनगर और अंडर ब्रिज में पानी भरने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह सड़कें तालाब जैसी नजर आईं और वाहन चालकों को घंटों जाम व जलभराव से जूझना पड़ा।
जवाब दे गई जल निकासी की व्यवस्था
बारिश शुरू होते ही शहर की जल निकासी व्यवस्था जवाब देती नजर आई। सर्किट हाउस क्षेत्र और बैंक कॉलोनी की सड़कों पर लंबे समय तक पानी जमा रहा। भरहुत नगर और राजेंद्र नगर में नालियां ओवरफ्लो होने से बारिश का पानी सड़कों पर बहता रहा। बस स्टैंड ,नई बस्ती और प्रेमनगर में कई गलियां जलमग्न हो गईं जबकि अंडर ब्रिज में पानी भरने से वाहन चालकों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। कई दोपहिया वाहन पानी में बंद हो गए और लोगों को उन्हें धक्का लगाकर बाहर निकालना पड़ा।
पानी ने ली ट्रैफिक की परीक्षा
बारिश के दौरान कार्यालय और स्कूलों की छुट्टी का समय होने से शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात भी प्रभावित रहा। पानी से भरी सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए और कई स्थानों पर जाम की स्थिति बन गई। पैदल चलने वालों को भी घुटनों तक पानी में होकर गुजरना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर मानसून में यही हाल होता है, लेकिन जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं किया गया।
कॉलोनियों में भरा पानी
शहर में मानसून पूर्व नालों की सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए गए थे, लेकिन पहली अच्छी बारिश में ही कई कॉलोनियों और प्रमुख सड़कों पर जलभराव ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए। जिन इलाकों में हर वर्ष पानी भरने की समस्या सामने आती है, वहां इस बार भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं दिखा।
जल निकासी व्यवस्था चरमराई
शहर के विभिन्न इलाकों में गंभीर जलभराव की स्थिति देखते हुए नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामकुमार तिवारी ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम की उदासीनता और लापरवाही के कारण शहर की जनता को हर साल इस समस्या से जूझना पड़ता है। रामकुमार तिवारी ने कहा कि शहर में चल रहे सीवर निर्माण कार्य अधूरे और गैर-जिम्मेदाराना तरीके से किए गए हैं, जिसके चलते जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। उन्होंने बताया कि नाला और ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है, जिससे थोड़ी सी बारिश में ही सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन क्या जलनिकासी के लिए कोई ठोस और प्रभावी योजना नहीं बनाई गई? अगर बनाई गई थी, तो उसका जमीनी स्तर पर कोई असर क्यों नहीं दिख रहा है? तिवारी ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि शहरवासियों को हर बारिश में इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इंतजार के बाद राहत
लंबे समय से उमड़ घुमड़ रहे बादलों ने दोपहर बरसे। इससे लोगों ने राहत महसूस की। मौसम विभाग के अनुसार सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक जिले में 32.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई। बारिश के चलते अधिकतम तापमान घटकर 33 डिग्री सेल्सियस रह गया, जबकि न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। हालांकि तापमान में गिरावट से राहत मिली, लेकिन हवा में नमी 98 प्रतिशत तक पहुंचने से उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। मौसम विभाग ने अगले 24 से 48 घंटों के दौरान जिले में मध्यम से तेज बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है।
कंडेक्टर के कंधों पर बच्चे

घूरडांग अंडर पास में क्रिस्तुकला स्कूल की बस जल भराव में फंस गई। मिशनरी स्कूल के चालक ने जोखिम लेते हुए बस को पानी से निकालना चाहा लेकिन गहराई देखते हुए बस आगे नहीं बढाई गई। बच्चों को बचाने के प्रयास में कंडेक्टर द्वारा कंधों में बैठाकर पानी से सुरक्षित जगह पर ले जाया गया।

महापौर के निज निवास की गली में पानी भर गया।

पुराना बसस्टैंड के सभी रास्तों में जलभराव हो गया।

जिला अस्पताल में भर गया पानी।

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