मध्यप्रदेश सरकार एक महत्वपूर्ण राजनीतिक नियुक्ति की तैयारी में जुटी है। दरअसल, विधानसभा में मुख्य सचेतक का पद भरने जा रही है, जो सदन की कार्यवाही के सुचारू संचालन और दलीय अनुशासन के लिए काफी अहम माना जाता है।

विधानसभा या संसद में मुख्य सचेतक का पद केवल एक औपचारिक नियुक्ति नहीं है।
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश सरकार एक महत्वपूर्ण राजनीतिक नियुक्ति की तैयारी में जुटी है। दरअसल, विधानसभा में मुख्य सचेतक का पद भरने जा रही है, जो सदन की कार्यवाही के सुचारू संचालन और दलीय अनुशासन के लिए काफी अहम माना जाता है। इस पद पर नियुक्ति के साथ ही कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया जाएगा, जिसके चलते यह नियुक्ति और भी अहम हो गई है। गौरतलब है कि अभी संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ही विधानसभा में मुख्य सचेतक की भूमिका भी निभाते आए हैं, लेकिन नए मुख्य सचेतक की नियुक्ति होने से उनका भार भी कम कर दिया जाएगा।उक्त पद के लिए पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी विधायकों के नाम पर विचार किया जा रहा है। इस दौड़ में पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव और अजय विश्नोई के नाम चर्चा में हैं। हालांकि, दावा यह भी किया जा रहा है कि विधायक दल के कोषाध्यक्ष के लिए भी अजय विश्नोई के नाम की चर्चा है।
कई बार बयां कर चुके दर्द
उक्त दोनों ही नेता भाजपा के कद्दावर नेता हैं। सदन की कार्यवाही का लंबा अनुभव रखते हैं, लेकिन इन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी। बीच-बीच में दोनों ही नेता सत्ता-संगठन के सामने अपना दर्द बयां भी कर चुके हैं। अब पार्टी इनमें से किसी एक को मुख्य सचेतक की बड़ी जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें सरकार में एक महत्वपूर्ण भूमिका देने की योजना बना रही है।
सीएम और प्रदेशाध्यक्ष लेंगे फैसला
अभी सदन के भीतर फ्लोर मैनेजमेंट की पूरी जिम्मेदारी संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के कंधों पर है। अब मुख्य सचेतक की नियुक्ति करके उनके कार्यभार को बांटा जाएगा, जिससे सरकार सदन में और अधिक मजबूती के साथ अपना पक्ष रख सकेगी। इस नियुक्ति पर अंतिम मुहर मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच विचार-विमर्श के बाद ही लगेगी।
इसलिए महत्वपूर्ण है मुख्य सचेतक का पद
विधानसभा या संसद में मुख्य सचेतक का पद केवल एक औपचारिक नियुक्ति नहीं है। यह किसी भी राजनीतिक दल का वह प्रमुख पदाधिकारी होता है, जो सदन के भीतर पार्टी के सभी सदस्यों को बांधकर रखता है। इसकी भूमिका पार्टी नेतृत्व और विधायकों के बीच एक पुल की तरह होती है। मुख्य सचेतक यह सुनिश्चित करता है कि पार्टी के सभी सदस्य दलीय अनुशासन में रहें और पार्टी लाइन से अलग जाकर कोई बयानबाजी या मतदान न करें। यह मुख्यमंत्री या विपक्ष के नेता के प्रमुख सलाहकार के रूप में भी कार्य करता है और सदन में पार्टी की रणनीति के प्रबंधन की अहम जिम्मेदारी निभाता है। महत्वपूर्ण विधेयकों पर मतदान के समय सभी सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करना और उन्हें पार्टी के पक्ष में वोट करने का निर्देश देना इसका सबसे प्रमुख कार्य है।

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