मध्यप्रदेश में सरकारी भर्ती परीक्षाओं के लिए वन टाइम फीस (OTF) लागू करने की मांग को लेकर युवा कांग्रेस 17 जून से ग्वालियर से 'रन फॉर ओटीएफ' आंदोलन शुरू करने जा रही है। जानिए क्या है राजस्थान मॉडल और क्यों उठ रही है यह मांग।

भोपाल. स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के हक में अब एक बड़ा आंदोलन आकार लेने जा रहा है। प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 'वन टाइम फीस' (OTF) यानी एकमुश्त शुल्क व्यवस्था लागू करने की मांग अब तेज हो गई है। युवा कांग्रेस ने डॉ. मोहन यादव सरकार पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान युवाओं से जो वादा किया गया था, सरकार बनने के बाद उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इसी के विरोध में युवा कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 17 जून से प्रदेशव्यापी आंदोलन का एलान किया है।
युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मितेंद्र दर्शन सिंह यादव ने आंदोलन की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इस राष्ट्रव्यापी और प्रदेशव्यापी संघर्ष की शुरुआत 17 जून को ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर से होगी। ग्वालियर में सबसे पहले ‘रन फॉर ओटीएफ’ (Run for OTF) अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में बेरोजगार युवा और छात्र शामिल होंगे। इसके बाद इस आंदोलन को केवल एक शहर तक सीमित न रखकर मध्यप्रदेश के सभी जिलों में फैलाया जाएगा। आने वाले दिनों में सभी जिला मुख्यालयों पर पदयात्रा, मशाल जुलूस और सघन जनजागरण अभियान चलाकर सरकार की नीतियों को बेनकाब किया जाएगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए 'वन टाइम फीस' (OTF) एक बेहद कल्याणकारी योजना है। इस व्यवस्था के तहत किसी भी अभ्यर्थी को सरकारी भर्ती परीक्षाओं के लिए बार-बार अलग से आवेदन शुल्क नहीं देना होता। उम्मीदवार को केवल एक बार पोर्टल पर पंजीयन (One Time Registration) कराना होता है और एक तय शुल्क जमा करना पड़ता है। इसके बाद वह सालभर में निकलने वाली विभिन्न सरकारी भर्तियों (जैसे MP ESB या अन्य विभागों की परीक्षाएं) के लिए मुफ्त या बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के आवेदन कर सकता है। युवा कांग्रेस का तर्क है कि जब राजस्थान सरकार अपने प्रदेश के युवाओं के लिए यह मॉडल सफलतापूर्वक लागू कर सकती है, तो मध्यप्रदेश में इसे लागू करने में क्या अड़चन है?
छात्रों की आर्थिक बदहाली का हवाला देते हुए मितेंद्र दर्शन सिंह यादव ने कहा कि आज के दौर में एक छात्र पर भर्ती परीक्षाओं की फीस का बहुत बड़ा आर्थिक बोझ है। मध्यप्रदेश में हर साल दर्जन भर से अधिक परीक्षाएं आयोजित होती हैं। एक औसत छात्र सालभर में अलग-अलग विभागों के फॉर्म भरने में ही करीब ₹10,000 से ₹15,000 तक खर्च कर देता है। कई बार आर्थिक तंगी के कारण होनहार छात्र परीक्षा का फॉर्म तक नहीं भर पाते, जो उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में एक सरकारी परीक्षा का आवेदन शुल्क औसतन ₹400 से ₹500 के बीच है। यदि कोई छात्र तीन या चार परीक्षाओं में बैठता है, तो केवल फीस ही हजारों में पहुंच जाती है। इसके अलावा कोचिंग, रहने और खाने का खर्च अलग है। ऐसे में प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण और वंचित वर्ग के परिवारों से आने वाले छात्रों पर यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं है।
युवा कांग्रेस के नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि विधानसभा चुनाव के समय युवाओं को लुभाने के लिए जो बड़े-बड़े वादे किए गए थे, उन्हें अब अमलीजामा पहनाने का वक्त आ गया है। सरकार की चुप्पी यह दर्शाती है कि वह युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है। संगठन ने संकल्प लिया है कि जब तक मध्यप्रदेश के बेरोजगार युवाओं को इस भारी-भरकम फीस से मुक्ति नहीं मिल जाती और सरकार आधिकारिक तौर पर OTF योजना लागू नहीं कर देती, तब तक उनका यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।

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