मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण पर सियासत गरमाई। राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में ठोस आंकड़े पेश करने की मांग की, वहीं मंत्री राकेश सिंह ने कांग्रेस पर लगाया धोखाधड़ी का आरोप।

जबलपुर। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के हालिया रुख के बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक-दूसरे पर हमलावर हैं। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने जहाँ राज्य सरकार की कानूनी पैरवी और आंकड़ों की प्रस्तुति पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं प्रदेश सरकार के मंत्री राकेश सिंह ने इस पूरी स्थिति के लिए कांग्रेस की तत्कालीन सरकार की जल्दबाजी को जिम्मेदार ठहराया है।
मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 फीसदी आरक्षण देने के मुद्दे पर सूबे की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। जबलपुर पहुंचे राज्यसभा सांसद एवं देश के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने राज्य सरकार पर हाईकोर्ट में मजबूती से पक्ष न रखने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 2019 में बिना पर्याप्त तैयारी के कानून बनाकर ओबीसी वर्ग के साथ छलावा किया था, जिसकी वजह से आज यह कानूनी उलझन पैदा हुई है।
शनिवार को जबलपुर पहुंचे राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के जरिए ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। इसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हो गया, इसलिए इस अध्यादेश और कानून का अदालत में बचाव करने की पूरी जिम्मेदारी भाजपा सरकार की थी।
तन्खा ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से यह साफ झलकता है कि राज्य सरकार अदालत के समक्ष पर्याप्त और ठोस आंकड़े प्रस्तुत करने में नाकाम रही। यदि सरकार समय पर मजबूती से डेटा पेश करती, तो संभवतः आज फैसला कुछ और होता।
वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने ऐतिहासिक इंदिरा साहनी केस का हवाला देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया था कि सामान्य स्थितियों में आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। यदि कोई राज्य 50 फीसदी की सीमा को पार करना चाहता है, तो उसे असाधारण परिस्थितियों के समर्थन में ठोस और प्रामाणिक मात्रात्मक आंकड़े (Quantifiable Data) अदालत के समक्ष रखने होते हैं।
उन्होंने कहा कि अब भी रास्ता बंद नहीं हुआ है। यदि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है, तो यह सही दिशा में कदम है। सरकार को अब पूरी तैयारी के साथ शीर्ष अदालत में तथ्य और डेटा पेश करने चाहिए।
राजनीतिक दलों की भूमिका पर स्थिति स्पष्ट करते हुए तन्खा ने कहा कि कोई भी राजनीतिक पार्टी सीधे तौर पर इस तरह की याचिका दायर नहीं कर सकती। पार्टी के पदाधिकारी या व्यक्तिगत प्रतिनिधि याचिका में हस्तक्षेप (Intervention) कर सकते हैं या कानूनी समर्थन दे सकते हैं, लेकिन किसी भी सरकारी अध्यादेश या अधिनियम को बचाने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकार की ही होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछड़ेपन से जुड़े आधिकारिक आंकड़े और प्रशासनिक तथ्य केवल सरकार के पास ही उपलब्ध होते हैं।
विवेक तन्खा के बयानों पर पलटवार करते हुए मध्य प्रदेश के मंत्री राकेश सिंह ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। जबलपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा पिछड़ा वर्ग के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश से यह बात पूरी तरह शीशे की तरह साफ हो चुकी है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार जो विधेयक लेकर आई थी, वह बेहद जल्दबाजी में और बिना किसी ठोस आधार के तैयार किया गया था। उसमें कई तकनीकी और कानूनी कमियां थीं, जिसकी वजह से आज यह स्थिति निर्मित हुई है।
कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह ने स्पष्ट किया कि वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार ओबीसी वर्ग सहित सभी वर्गों के अधिकारों के प्रति सजग है। सरकार का एकमात्र प्रयास यह है कि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो और सभी को नियमानुकूल और कानूनी रूप से टिकाऊ न्याय मिले। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट और कानूनी मंचों पर मजबूती से पक्ष रखकर ओबीसी समाज के हितों की रक्षा करेगी।
मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण पर सियासत गरमाई। राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में ठोस आंकड़े पेश करने की मांग की, वहीं मंत्री राकेश सिंह ने कांग्रेस पर लगाया धोखाधड़ी का आरोप।
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