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MP महाक्रांति रैली: आउटसोर्स/अस्थायी कर्मचारियों ने माँगा समान वेतन, नियमितीकरण की मांग

मध्य प्रदेश में बैंक मित्र, चौकीदार, पंप ऑपरेटर सहित हज़ारों आउटसोर्स, अस्थायी कर्मचारियों ने भोपाल में 'महाक्रांति रैली' के तहत प्रदर्शन किया। जानें, क्यों कर रहे हैं समान कार्य-समान वेतन और नियमितीकरण की मांग।

By: Ajay Tiwari

Oct 12, 20255:38 PM

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MP महाक्रांति रैली: आउटसोर्स/अस्थायी कर्मचारियों ने माँगा समान वेतन, नियमितीकरण की मांग

भोपाल में महा प्रदर्शन

हल्ला बोल

भोपाल: स्टार समाचार वेब. 

मध्य प्रदेश में वर्षों से अस्थिर रोज़गार और आर्थिक अन्याय झेल रहे हज़ारों आउटसोर्स, अस्थायी और अंशकालीन कर्मचारियों ने रविवार को भोपाल में अपनी आवाज़ बुलंद की। बैंक मित्र, पंचायत चौकीदार, पंप ऑपरेटर, अंशकालीन भृत्य, राजस्व सर्वेयर सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी तुलसी नगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क में एक मंच पर जुटे और 'महाक्रांति रैली' के तहत ज़ोरदार प्रदर्शन किया।

ठेकेदारी प्रथा के खिलाफ साझा आवाज़

'ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थायी, अंशकालीन, ग्राम पंचायत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश' के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सरकारी विभागों में तेज़ी से बढ़ रही ठेकेदारी और आउटसोर्सिंग प्रथा का विरोध करना है।

मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने इस आंदोलन को किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के शोषित कर्मचारियों की साझा आवाज़ बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कर्मचारियों की मेहनत और निष्ठा का सम्मान ही सुशासन की असली पहचान है और वे सरकार से केवल वादे नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की गारंटी चाहते हैं।

शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश का पूरा सरकारी सेक्टर अब ठेकेदारों और निजी कंपनियों के हवाले कर दिया गया है। क्लास 3 और क्लास 4 के ज़्यादातर पद, जहाँ सबसे अधिक रोज़गार मिलता था, अब आउटसोर्स कर दिए गए हैं। पंचायतों में चौकीदारों को मात्र ₹3,000 मासिक वेतन मिल रहा है, जबकि सीएम राइज स्कूलों, वल्लभ भवन और सतपुड़ा भवन जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर भी नियुक्तियाँ आउटसोर्स के ज़रिए की जा रही हैं।

25 साल की सेवा, वेतन महज़ ₹2000

प्रदर्शन में शामिल ग्राम पंचायत चौकीदार रामनिवास केवट की कहानी प्रदेश के लाखों अस्थायी कर्मचारियों के दर्द को बयां करती है। उन्होंने बताया कि पिछले 25 सालों से चौकीदारी का काम कर रहे रामनिवास ने ₹300 मासिक तनख्वाह से शुरुआत की थी, लेकिन 25 साल बाद आज भी उनका वेतन केवल ₹2,000 महीना है, वह भी 5-6 महीने की देरी से मिलता है।

रामनिवास ने दुख व्यक्त किया कि इस मामूली वेतन में पत्नी, तीन बच्चों और बुजुर्ग पिता का भरण-पोषण करना असंभव है। उन्होंने कहा कि "बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना और परिवार को पालना बेहद कठिन है। कई बार तो घर में आटा तक नहीं होता, इसलिए चौकीदारी के साथ-साथ मज़दूरी भी करनी पड़ती है।"

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से बढ़ी उम्मीद

संयुक्त मोर्चा ने सुप्रीम कोर्ट के 19 अगस्त 2025 के फ़ैसले का हवाला देते हुए 'समान कार्य के लिए समान वेतन' की मांग दोहराई। वासुदेव शर्मा ने बताया कि न्यायालय ने स्पष्ट कहा है कि लंबे समय से कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों से कम वेतन पर समान कार्य कराना 'श्रमिक शोषण' है और समान वेतन तथा सामाजिक सुरक्षा लाभ पाना उनका संवैधानिक अधिकार है। मोर्चे का मानना है कि यह फ़ैसला प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के लिए "न्याय की नई उम्मीद" लेकर आया है।

मोर्चा ने सरकार से अपील की है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन किया जाए, न्यूनतम मासिक वेतन को बढ़ाकर ₹21,000 किया जाए और ठेकेदारी प्रथा को तत्काल समाप्त कर वर्षों से बंद पड़ी तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के नियमित पदों पर भर्ती शुरू की जाए। मोर्चा ने यह भी चेतावनी दी है कि वे अपने अधिकारों के लिए हाईकोर्ट में भी याचिका दायर करेंगे। यह प्रदर्शन दो साल की लंबी प्रतीक्षा और आवेदन के बाद, 12 अक्टूबर के लिए मिली पुलिस अनुमति के बाद आयोजित किया गया।

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