नागौद में एक कनिष्ठ अभियंता के घर बिजली बाधित होने पर 33 केवी फीडर बंद कराने के आरोप लगे हैं। 22 मिनट की कटौती से शहर, गांव, अस्पताल और सरकारी कार्यालय प्रभावित हुए, जांच की मांग उठी।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
बिजली कंपनी के अधिकारी भी इस गर्मी में अपने आप को किसी नेता से कम नहीं मानते। इस भीषण गर्मी में जहां उपभोक्ता दिन रात बिजली कटौती से परेशान है वहीं बिजली अधिकारी के घर जरा सी बिजली क्या बंद हुई पूरे शहर में अंधेरा कर दिया गया। बिजली विभाग के भीतर अधिकारों के कथित दुरुपयोग का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वितरण कंपनी के सहायक अभियंता केके गुप्ता द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि ट्रांसमिशन के कनिष्ठ अभियंता जेके सिंह के घर की बिजली बंद होने पर पूरे 33 केवी नागौद फीडर को दो बार बंद करा दिया गया। इस कार्रवाई से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों उपभोक्ताओं को रात में अनावश्यक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा। मामले की सूचना ट्रांसमिशन के अधीक्षण अभियंता, वितरण कंपनी के अधीक्षण अभियंता, तहसीलदार, एसडीएम और थाना प्रभारी को भी दी गई। हालांकि अभी तक इस मामले में किसी भी अधिकारी द्वारा कोई एक्शन नहीं लिया गया। गौरतलब है कि हाल ही में ऐसा ही एक मामला चित्रकूट से आया था जहां घरेलू बिजली बंद से गुस्साए न्यायधीश द्वारा पूरे चित्रकूट की बिजली बंद करा दी गई थी।
ऑपरेटर ने बंद किया फीडर
सूत्रों ने बताया कि मामला 20 जून की मध्यरात्रि का है जब नागौद खेरवाटोला निवासी मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी 132 केवी उपकेंद्र में पदस्थ कनिष्ठ अभियंता जेके सिंह के घर पर रात में सालगिरह महोत्सव आयोजन चल रहा था तभी अचानक से बिजली सप्लाई बंद हो गई। साहब ने आव देखा न ताव, तमतमाते हुए पूरे नागौद शहर की बिजली बंद करा दी। 20 जून की मध्य रात्रि 12:05 बजे शाहपुर में पदस्थ उपकेंद्र ऑपरेटर रोहित दहिया द्वारा 33/11 केव्ही में पदस्थ आॅपरेटर को सूचना दी गई कि132 केवी उपकेंद्र में पदस्थ कनिष्ठ अभियंता जे.के. सिंह के निवास पर बिजली आपूर्ति बाधित है और संभवत: टाउन फीडर में फाल्ट है। सूचना मिलते ही लाइन कर्मचारियों को मौके पर भेजा गया। जांच में पाया गया कि टाउन फीडर पूरी तरह चालू था तथा समस्या केवल संबंधित घरेलू कनेक्शन तक सीमित थी। इसके बावजूद आरोप है कि रात 12:15 बजे से 12:32 बजे तक (17 मिनट)और फिर 12:37 बजे से 12:42 बजे तक (5 मिनट) 33 केवी नागौद फीडर बंद रखा गया। कुल 22 मिनट की इस कटौती से नागौद शहर के दो और ग्रामीण क्षेत्र के चार फीडरों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। आॅपरेटर से पूंछा जाने पर उसने बताया कि ट्रांसमिशन के कनिष्ठ अभियंता द्वारा बिजली बंद करने का दवाब बनाया गया।
अस्पताल, थाना और सरकारी दफ्तर भी हुए प्रभावित
वितरण कंपनी के अधिकारी ने आरोप लगते हुए बताया कि अनैतिक रूप से नागौद फीडर को दो बार बंद कराया गया जिसका असर केवल आम उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहा। नागौद शहर को आवश्यक सेवाएं देने वाले सिविल अस्पताल, थाना और अन्य शासकीय कार्यालयों की बिजली भी बाधित हो गई। आधी रात को अचानक बिजली गुल होने से नाराज नागरिक उपकेंद्र पहुंच गए और अधिकारियों के समक्ष अपना आक्रोश जताया। सहायक अभियंता ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि कनिष्ठ अभियंता ने अपने घरेलू कनेक्शन की समस्या के चलते 33 केवी फीडर बंद कराने के निर्देश दिए। पत्र में इसे कंपनी के नियमों और संचालन व्यवस्था के विपरीत बताते हुए गंभीर अनियमितता माना गया है।
जांच और कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर ट्रांसमिशन कंपनी के कार्यपालन अभियंता (परीक्षण) एवं अन्य अधिकारियों को भेजे गए पत्र में कनिष्ठ अभियंता जे.के. सिंह और उपकेंद्र आॅपरेटर रोहित दाहिया के विरुद्ध विभागीय जांच और उचित कार्रवाई की मांग की गई है। पत्र में कहा गया है कि यदि ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई तो भविष्य में भी उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
मामला दोनों बिजली कंपनियों के मध्य का है, 20 जून की रात को 22 मिनट तक नागौद शहर की बिजली बंद की गई थी। सूचना मिलते ही विभागीय जांच के लिए पत्र लिखा गया है।
केके गुप्ता, कनिष्ठ अभियंता, ओएंडएम नागौद


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