नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव किए हैं। 600 एक्सपर्ट्स को हटाने से लेकर चार-स्तरीय प्रश्न-पत्र जांच व्यवस्था और CISF सुरक्षा तक की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (National Testing Agency - NTA) इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। परीक्षाओं में सामने आई विभिन्न गड़बड़ियों और विवादों के बाद एजेंसी ने अपनी आंतरिक व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी कड़ी में पहले 50 से अधिक कर्मचारियों को हटाने के बाद अब परीक्षा से जुड़े लगभग 600 विशेषज्ञों (Experts) को हटाकर उनकी जगह नए प्रोफेशनल्स को शामिल किया गया है। शिक्षा मंत्रालय के निर्देशन में हो रहे इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य देश भर में आयोजित होने वाली परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को फिर से बहाल करना है।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में UGC NET परीक्षा के कुछ प्रमुख विषयों—जैसे इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी—की परीक्षा को दोबारा आयोजित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था। उच्च स्तरीय जाँच के दौरान इन विषयों के प्रश्न-पत्रों में कई तथ्यात्मक (factual), टाइपिंग और अनुवाद संबंधी गंभीर त्रुटियाँ पाई गई थीं। इन गलतियों के कारण NTA की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे, जिसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन करने के निर्देश दिए।
NTA में सुधार की यह प्रक्रिया केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें व्यापक फेरबदल किया जा रहा है। समीक्षा बैठकों के बाद एजेंसी ने पहले ही 50 से अधिक कर्मचारियों को सेवा से मुक्त कर दिया था। इसके साथ ही, NTA ने साइबर सिक्योरिटी, साइकोमेट्रिक्स (psychometrics), प्रश्न-पत्र डिजाइन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के डोमेन एक्सपर्ट्स को जोड़ने के लिए 10 नए प्रोफेशनल पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। एजेंसी का मुख्य फोकस अब केवल स्टाफ की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष विशेषज्ञों को शामिल करने पर है।
शिक्षा मंत्रालय और NTA के महानिदेशक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, परीक्षा टीम का पूरी तरह से पुनर्गठन किया गया है। इसके तहत परीक्षा निर्माण और प्रबंधन से जुड़े करीब 600 पुराने विशेषज्ञों को हटा दिया गया है और उनकी जगह नए और अनुभवी विशेषज्ञों को नियुक्त किया गया है। चूँकि प्रश्न-पत्र तैयार करने से लेकर उसकी अंतिम समीक्षा तक की पूरी प्रक्रिया परीक्षा की विश्वसनीयता की रीढ़ होती है, इसलिए इस बड़े बदलाव को बेहद अहम माना जा रहा है।
भविष्य में प्रश्न-पत्रों में किसी भी प्रकार की गलती से बचने के लिए NTA ने एक सख्त 'चार-स्तरीय प्रश्न-पत्र जाँच प्रणाली' (Four-Tier Question Paper Checking System) लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था के तहत प्रश्न-पत्र की स्क्रूटनी अब केवल एक स्तर पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि इसे चार अलग-अलग चरणों से गुजरना होगा। ऐसा करने से तथ्यात्मक, भाषाई, टाइपिंग और अनुवाद संबंधी अशुद्धियों को परीक्षा आयोजित होने से पहले ही आसानी से पकड़ा और सुधारा जा सकेगा।
इन ढांचागत सुधारों के साथ-साथ NTA में अगले कुछ हफ्तों के भीतर 20 से 25 नए अधिकारियों की नियुक्ति भी की जाएगी। इसके लिए एक विस्तृत इंडक्शन प्लान तैयार किया गया है। प्रशासनिक और तकनीकी बदलावों के अलावा, NTA के कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को भी और अधिक पुख्ता बनाने के लिए इसे केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के हवाले करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

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