ममलेश्वर लोक निर्माण के स्थान परिवर्तन की मांग को लेकर ओंकारेश्वर तीर्थनगरी में स्वैच्छिक बंद रहा। मठ-मंदिर टूटने की आशंका से संत और स्थानीय संघ एकजुट हुए। ब्रह्मपुरी, शिवपुरी और विष्णुपुरी में पसरा सन्नाटा, यात्रियों को हुई भारी परेशानी।

हाइलाइट़्स
ओंकारेश्वर। स्टार समाचार वेब
तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में ममलेश्वर लोक निर्माण के प्रस्तावित स्थान परिवर्तन की मांग को लेकर अभूतपूर्व और व्यापक स्वैच्छिक बंद देखने को मिला। सोमवार को किए गए इस बंद के आह्वान के चलते नगर में पूरी तरह सन्नाटा छाया रहा, जिसके कारण हजारों की संख्या में आए श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
ममलेश्वर लोक निर्माण के स्थान को बदलने की मांग को लेकर स्थानीय संत समुदाय, पंडा संघ, नाविक संघ और अन्य व्यापारिक संगठनों का आंदोलन पिछले कई दिनों से चल रहा है। सभी आंदोलकारियों ने एक स्वर में यह मांग दोहराई है कि निर्माण स्थल बदला जाए ताकि क्षेत्र में स्थित प्राचीन मठ और मंदिर टूटने से बच सकें।
विरोध की गंभीरता के चलते, सोमवार को पूरा ओंकारेश्वर लगभग लॉकडाउन जैसी स्थिति में आ गया। तीर्थनगरी की तीनों प्रमुख पुरियाँ—ब्रह्मपुरी, शिवपुरी और विष्णुपुरी—पूरी तरह बंद रहीं। ऑटो-टेंपो और नाव संचालन सहित सभी दुकानें ठप रहीं। सिर्फ दूध, दवाइयां और सब्जी जैसी आवश्यक सेवाओं को शुरुआत में कुछ देर के लिए खोला गया, लेकिन बाद में वे भी बंद हो गईं।
इस अभूतपूर्व बंद ने दूर-दूर से भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आए हजारों श्रद्धालुओं को मुश्किल में डाल दिया। पीने के पानी, चाय-नाश्ते और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी तीर्थयात्रियों को तरसना पड़ा। हजारों श्रद्धालु यही पूछते रहे कि पूरा नगर बंद क्यों है, और उन्हें इतनी व्यापक स्तर पर परेशानी क्यों झेलनी पड़ रही है। स्थानीय इतिहास में शायद यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर बंद के कारण श्रद्धालुओं को पानी और भोजन जैसी आवश्यक वस्तुओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ा हो। स्थानीय संघ और संत समुदाय अपनी मांग पर अडिग हैं कि मठ-मंदिरों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए लोक निर्माण का स्थान अविलंब बदला जाए।

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