सतना शहर में खुले ट्रांसफार्मर और फ्यूज बॉक्स लगातार हादसों को न्योता दे रहे हैं। झूलती तारें, हाई वोल्टेज वायरिंग और बढ़ता लोड भीषण गर्मी में आगजनी और करंट दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ा रहे हैं।
By: Yogesh Patel
Feb 27, 20263:49 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
शहर में जगह-जगह खुले बिजली के ट्रांसफार्मर हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं। हालत यह है कि कहीं खुले ट्रांसफॉर्मरों से तारें झूल रही हैं तो कहीं फ्यूज बॉक्स खुले में पड़े हुए हैं। बॉक्स का ढक्कन गायब है और अंदर की हाई वोल्टेज वायरिंग बाहर नजर आ रही है। बड़ी बात यह है कि इस प्रकार की समस्या मुख्य मार्ग और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में हैं, जहां हर पल चहल-पहल बनी रहती है। चौकाने वाली बात यह है कि इन खुले ट्रांसफार्मरों और फ्यूज बॉक्स के नीचे ही कई फल सब्जियों वालों की मंडी भी सजती है। इसके अलावा शहरी क्षेत्र में लगे ट्रांसफार्मरों के पास ही गाड़ियों की पार्किंग भी हो रही है। ऐसी स्थिति में आने वाली गर्मी में किसी भी समय आगजनी की घटना घट सकती है।
शहर संभाग में 1250 से अधिक ट्रांसफार्मर हैं जिनमे से 200 से अधिक फ्यूज बॉक्सों को सुधार कार्य के लिए चिन्हित किया गया था। इन फ्यूज बॉक्स के ढक्कन खुले हुए या टूटे हुए पाए गए थे। कई फ्यूज बॉक्स आगजनी की घटना के बाद बदले गए तो डायरेक्ट कर दिए गए, जिनमे तार झूल रही है। बिजली कंपनी द्वारा अभी तक 100 फ्यूज बॉक्स सुधार दिए गए हैं। अभी भी बड़े पैमाने पर खुले फ्यूज बॉक्स जनता और जानवरों के लिए खतरा बने हुए हैं।
कई बार शिकायत लेकिन नहीं हुआ समाधान
स्थानीय स्तर पर इस समस्या से परेशान लोगों ने कई बार बिजली कंपनी के अधिकारियों को शिकायतें भी की लेकिन आज तक खुले ट्रांसफॉर्मरों और फ्यूज बॉक्स को सुरक्षित करने की दिशा में कोई बड़ी पहल नहीं की गई। बिजली कंपनी के द्वारा समय पर राजस्व वसूली अभियान तो चलाया जाता है लेकिन लोगों और मवेशियों के जीवन के लिए खतरा बन गए खुले फ्यूज बॉक्सों और ट्रांसफॉर्मरों को हमेशा अनदेखा किया जाता है। बताया जाता है कि ट्रांसफार्मर से ज्यादा खतरा उसके नीचे लगे फ्यूज बॉक्स से होता है एक तो यह जमीन कि सतह से लगा होता है दूसरा इसमें 440 वोल्ट का करेंट भी दौड़ता रहता है।
नियमों को नहीं मानते लोग
बिजली कंपनी के द्वारा बनाये गए नियमों को ताक में रखकर घर निर्माण और दुकानें संचालित की जा रही हैं। ऐसे उपभोक्ताओं के खिलाफ विभाग द्वारा समय-समय पर नोटिस जारी कर कार्रवाई भी की जाती है। विद्युत कंपनी के अनुसार घर निर्माण के लिए बिजली पोलों, लाइनों और ट्रांसफार्मरों से 3.7 मीटर की लम्बवत दूरी एवं सामानांतर दूरी 2 मीटर होनी चाहिए। इसी प्रकार मुख्य मार्गों में लगे ट्रांसफार्मरों और फ्यूजबॉक्सों से चारों तरफ 2 मीटर की दूरी पर ही दुकानों को संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
शार्ट-सर्किट के चलते हो चुकी हैं आगजनी की घटना
शहर के अंदर अलग-अलग स्थानों में खुले ट्रांसफॉर्मरों और फ्यूजबॉक्स में समय-समय पर शार्ट सर्किट की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बाद भी विभाग के अधिकारी लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। जानकारी के अनुसार हाल ही में हनुमान चौक की पार्किंग के पास स्थापित ट्रांसफार्मर में शार्ट सर्किट की वजह से चारपहिया वाहन जलकर खाक हो गया था। इसके अलावा जवाहर नगर स्थित काली मंदिर के पास वाला फ्यूज बॉक्स धू-धू कर जल गया था। लोड बढ़ने के कारण अस्पताल चौक में लगे ट्रांसफार्मर में आग लग गई थी, जिसमे कई केबलें जल गई थी। अभी भी कई जगह बड़े ट्रांसफार्मरों के चारों ओर दुकानें संचालित हो रही हैं लेकिन जिम्मेदार इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे। जिम्मेदारों को शायद किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार है।
भीषण गर्मी में बढ़ा जोखिम
इन दिनों तापमान लगातार बढ़ रहा है। एसी, कूलर और पंखों के अधिक उपयोग से बिजली की मांग बढ़ गई है, जिससे ट्रांसफार्मर पर अतिरिक्त लोड पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा लोड में फ्यूज और केबल गर्म होकर चिंगारी छोड़ सकते हैं। यदि फ्यूज बॉक्स खुला हो तो शॉर्ट सर्किट और आग लगने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। आसपास सूखी घास, प्लास्टिक और कचरा होने से आग तेजी से फैल सकती है। तेज धूप में धातु के हिस्से अत्यधिक गर्म हो जाते हैं, जिससे तकनीकी खराबी की संभावना भी बढ़ जाती है।
सभी फ्यूज बॉक्स को सुरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। सभी विद्युत कर्मियों एवं लाइन मैन को ट्रांसफार्मर की झूलती तारों का भी मेंटेनेंस के निर्देश दिए गए हैं। गर्मी के पहले एक बार फिर से पूरे शहरी क्षेत्र के ट्रांसफॉर्मरों और लाइनों को मेंटीनेंस कराया जायेगा ताकि उपभोक्ताओं को सतत निर्बाध बिजली मिल सके। दुकानदारों से अपील है कि ट्रांसफॉर्मर से दूरी बनाकर ही दुकान संचालित करें।
मृगेंद्र सिंह चंदेल, डीई सिटी