प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए निरंतर अभिनव और नीतिगत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विदिशा जिले से सफलता की एक ऐसी गौरवशाली गाथा सामने आई है, जिसने पूरे राज्य के सामने प्रशासनिक सूझबूझ और जनभागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

पोषण संजीवनी अभियान ने पेश की राज्य स्तरीय मिसाल
प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए नीतिगत प्रयास
भोपाल। स्टार समाचार वेब
प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए निरंतर अभिनव और नीतिगत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विदिशा जिले से सफलता की एक ऐसी गौरवशाली गाथा सामने आई है, जिसने पूरे राज्य के सामने प्रशासनिक सूझबूझ और जनभागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्वस्थ मध्यप्रदेश के संकल्पों को जमीनी धरातल पर उतारते हुए विदिशा जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए गए पोषण संजीवनी अभियान ने गंभीर कुपोषण के खिलाफ एक निर्णायक और प्रभावी जंग छेड़ दी है। यह अभियान इस बात का जीवंत प्रमाण बन गया है कि जब जिला प्रशासन और समाज की संवेदनशील ताकतें एक साथ कदम बढ़ाती हैं, तो कठिन से कठिन सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान सहज संभव हो जाता है।

कलेक्टर के नेतृत्व में पोषण संजीवनी अभियान
अमूमन यह देखा जाता है कि एनआरसी में उपचार के बाद जब बच्चे घर लौटते हैं, तो परिवारों की सीमित आर्थिक क्षमता और माताओं में पोषण संबंधी जागरूकता की कमी के कारण वे दोबारा कुपोषण चक्र में फंस जाते हैं। जून 2025 में हुए एक व्यापक सर्वे के दौरान जिले में 1,307 गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान होने पर समस्या की गंभीरता और स्पष्ट हो गई। इसी चुनौती को एक बड़े अवसर में बदलते हुए विदिशा जिला कलेक्टर अंशुल गुप्ता के नेतृत्व में पोषण संजीवनी अभियान की परिकल्पना की गई, जिसका मूल ध्येय बच्चों का तात्कालिक उपचार नहीं बल्कि उनका दीर्घकालिक सुपोषण सुनिश्चित करना था।
सुपोषण किट साबित हो रही संजीवनी
अभियान के तहत हर चिन्हित गंभीर कुपोषित बच्चे को तीन महीने तक अतिरिक्त पोषण देने के लिए 3000 रुपए की विशेष सुपोषण किट प्रदान की जा रही है। उच्च गुणवत्तायुक्त पौष्टिक तत्वों से भरपूर इस किट में दो किलो मूंगदाल, एक किलो बेसन, पंद्रह सौ ग्राम मुरमुरा, एक लीटर खाद्य तेल, एक किलो शुद्ध घी, डेढ़ किलो मूंगफली, एक किलो गुड़ पाउडर, दो किलो मल्टीग्रेन आटा, एक किलो सत्तू, दो किलो चावल और पांच सौ ग्राम तिल जैसी अत्यंत पौष्टिक सामग्रियां शामिल की गई हैं। यह संतुलित आहार बच्चों को प्रतिदिन 750 अतिरिक्त कैलोरी प्रदान करता है। शारीरिक विकास के लिए संजीवनी साबित हो रहा है।
39.21 लाख राशि स्वेच्छा से एकत्र
अभियान की सफलता के पीछे जनभागीदारी एक प्रमुख कारण बना। इस कार्य में समाज के विभिन्न वर्गों, स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने अभूतपूर्व संवेदनशीलता का परिचय दिया। समाज के सामूहिक प्रयासों से देखते ही देखते 39.21 लाख की सम्मानजनक राशि स्वेच्छा से एकत्र हो गई, जिसके माध्यम से अब तक सभी 1,307 बच्चों तक सुपोषण किट पहुंचाई जा चुकी है। यह जनसहयोग इस बात का सशक्त प्रतीक है कि समाज अपने नौनिहालों के स्वास्थ्य के प्रति कितना सजग और उत्तरदायी है।
जमीनी निगरानी से सफल परिणाम
प्रशासन ने केवल राशन वितरण तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि माताओं के व्यवहार में स्थायी बदलाव लाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के जमीनी अमले को पूरी मुस्तैदी से काम पर लगाया। आंगनवाड़ी कार्यकतार्ओं द्वारा माताओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों से सरल और पौष्टिक व्यंजन जैसे लड्डू, हलवा और सत्तू पेय बनाने की विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और आनंद को ध्यान में रखते हुए उन्हें खिलौना किट और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए टिफिन व पानी की बोतलें भी उपहार स्वरूप दी गईं।
63 फीसदी से अधिक बच्चे हुए सामान्य
जिले के कुल 1,307 कुपोषित बच्चों में से 772 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं, जिससे 63.02 प्रतिशत की उल्लेखनीय और ऐतिहासिक रिकवरी दर दर्ज की गई है। यह शानदार सफलता इस अभियान को मध्यप्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक अनुकरणीय रोल मॉडल के रूप में स्थापित करती है। यह अभियान अब एक प्रशासनिक पहल से आगे बढ़कर विदिशा में एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।
500 अतिरिक्त सुपोषण किट के वितरण का लक्ष्य
आगामी तिमाही के लिए 650 नए गंभीर कुपोषित बच्चों को इस अभियान से जोड़कर कुपोषण मुक्त करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अडाणी फाउंडेशन के सहयोग से जून माह में लटेरी, सिरोंज एवं कुरवाई जैसी दूरस्थ परियोजनाओं के चिन्हित गंभीर कुपोषित बच्चों के बीच 500 अतिरिक्त सुपोषण किट के वितरण का लक्ष्य रखा गया है।


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