12 नवंबर 2025 (बुधवार) का दैनिक पंचांग विस्तार से जानें। तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल और काल भैरव जयंती का महत्व। अपने दिन की योजना बनाने के लिए शुभ समय देखें।
By: Ajay Tiwari
Nov 12, 20251:00 AM
धर्म डेस्क. स्टार समाचार वेब
यह पंचांग नई दिल्ली के स्थानीय समय पर आधारित है और इसमें मुख्य रूप से मार्गशीर्ष (या कार्तिक पूर्णिमांत) मास के कृष्ण पक्ष की तिथियों का विवरण दिया गया है।
वार: बुधवार
तिथि:
अष्टमी – रात 10:58 बजे (22:58) तक
इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी।
मास: मार्गशीर्ष (अमांत) / कार्तिक (पूर्णिमांत)
पक्ष: कृष्ण पक्ष
पर्व/व्रत:
काल भैरव जयंती (अष्टमी तिथि की समाप्ति के आधार पर मनाई जाती है)
सूर्योदय: प्रातः 06:41 बजे
सूर्यास्त: सायं 05:28 बजे
चंद्र राशि: सिंह राशि
नक्षत्र: मघा
नक्षत्र समाप्ति समय: सायं 06:35 बजे (18:35)
योग: शुक्ल योग – प्रातः 08:02 बजे तक, उसके बाद ब्रह्म योग।
करण: कौलव करण – रात 10:58 बजे (22:58) तक।
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
ऋतु: हेमंत
किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को शुरू करने से पहले शुभ और अशुभ समय का ध्यान रखना आवश्यक है।
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:56 बजे से प्रातः 05:49 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 01:53 बजे से दोपहर 02:36 बजे तक
अमृत काल (Amrit Kalam): सायं 04:58 बजे से सायं 06:35 बजे तक
(नोट: इस दिन अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।)
राहुकाल: दोपहर 12:05 बजे से दोपहर 01:26 बजे तक
राहुकाल में कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
यमगण्ड: प्रातः 08:02 बजे से प्रातः 09:23 बजे तक
गण्डमूल नक्षत्र: मघा नक्षत्र (नक्षत्र समाप्ति तक) में गण्डमूल दोष रहेगा।
12 नवंबर 2025 को काल भैरव जयंती मनाई जाएगी। यह दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप, काल भैरव को समर्पित है।
महत्व: माना जाता है कि इसी दिन भगवान काल भैरव प्रकट हुए थे।
पूजा: इस दिन काल भैरव की विशेष पूजा-अर्चना करने से भय, रोग और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
उपाय: इस दिन भगवान भैरव को नारियल, गुड़, सरसों के तेल का दीपक अर्पित करना और कुत्ते को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है।