आधुनिक जीवनशैली, गलत एक्सरसाइज, मोबाइल-लैपटॉप का अधिक इस्तेमाल और सड़कों के गड्ढों से बढ़ती दर्द की समस्याओं का हल अब फिजियोथेरेपी से संभव है। सतना जिला अस्पताल में हर साल हजारों मरीज फिजियोथेरेपी का लाभ उठा रहे हैं। जानिए कैसे फिजियोथेरेपी घुटनों, कमर, गर्दन, जोड़ों, लकवा और खेलों की चोट जैसे रोगों में असरदार इलाज साबित हो रही है।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
आज के इस दौर में डॉक्टर के साथ ही फिजियोथेरेपिस्ट की भी भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। जहां एक ओर नई-नई बीमारियां बढ़ रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर गलत तरीके से एक्सरसाइज, गलत तरीके से बैठकर या लेटकर मोबाइल, लैपटॉप का इस्तेमाल, सड़कों में गड्ढे आदि से गर्दन, कमर, घुटने में दर्द जैसी दिक्कतें भी बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में अधिकांश लोग, दर्द निवारण के लिए मेडिसिन का इस्तेमाल करते हैं। अगर मरीज को उस दर्द को पूरी तरह से आराम नहीं मिलता तो चिकित्सक मरीज को फिजियोथेरेपी का सहारा लेने के लिए भी कहता है जो उनके इलाज के लिए काफी बेहतर साबित होती है। अस्पताल प्रबंधन आंकड़ों के मुताबिक जिला अस्पताल में वर्ष 2025 में अप्रैल से अगस्त के बीच यानि पांच माह में 4360 मरीजों ने अस्पताल में संचालित फिजियो थेरेपी सेंटर में पंजीयन कर अपना इलाज कराया।
साल दर साल बढ़ रहे मरीज
जिला अस्पताल में पदस्थ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि आज सभी बीमारियों में फीजियोथेरेपिस्ट की सलाह जरूर ली जाने लगी है। मरीज को दवाइयों के बाद फीजियो और एक्सेर्साइज से ही आराम मिलता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अगर पांच माह के डाटा पर गौर करें तो अभी तक 4360 मरीजों ने अपना पंजीयन कराकर फीजियो से अपना इलाज करवाया। अगर बीते साल के आंकड़ों की बात करें तो 10 हजार 400 मरीजों ने फीजियोथेरेपी का लाभ लिया, जिसमे फीजियोथेरेपी ओपीडी, ऑन कॉल बेड साइड एवं डीईआईसी गतिविधि भी शामिल है। बताया गया कि जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपी सेंटर में डॉ. संदीप तिवारी एमपीटी आर्थो, डॉ. मोहम्मदी अशरफ एमपीटी स्पाइन एवं डॉ. रिया सिंह के द्वारा सभी मरीजों को अलटरनेट शेड्यूल तैयार कर इलाज किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार यहां इलाज के लिए अल्ट्रासाउंड थेरेपी, टेंस, एसडबल्यूडी, पैराफिन पैक्स बाथ, फेसियल मसल स्टीमुलेटर, ट्रेक्शन, लंबर, सरवाइकल आदि उपकरण उपलब्ध हैं।
इन इलाजों में फीजियोथेरेपी कारगर
चिकित्सक ने बताया कि पहले फीजियोथेरेपी मुख्यतः घुटना, कमर, कन्धों एवं जोड़ों के दर्द, इनमे रेंज ऑफ मोशन को नार्मल रेंज में पावर के साथ लाने, लकवा, न्यूरोपैथी, पेरिफेरल न्यूरोपैथी, स्पोर्ट्स इंजरी, महिलाओं में ऑपरेशन के होने वाला दर्द, बच्चों में जीडीडी, सीपी एमआर आदि में प्रयोग किया जाता था। उन्होंने बताया कि आज आधुनिकता के इस दौर में गर्दन दर्द, कमर दर्द या फिर कोहनी का दर्द समान रूप से देखा जा रहा है। इसकी मुख्य वजह हमारी दैनिक दिनचर्या ही है। इसके अलावा सड़कों के गड्डों में आ जाने से भी लोगों में मोच आदि कि शिकायतें देखने को मिल रही हैं। इसके चलते तमाम तरफ के दर्द उनको परेशान करने लगते हैं। ऐसे में इसके इलाज के लिए फिजियोथेरेपी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके अलावा अगर सामान्य एक्सरसाइज भी रोजाना कर रहे हैं, तो इससे भी इन तमाम दर्द की समस्याओं से निदान मिल सकता है।


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