भारत और रूस के रिश्तों को लेकर चल रही अटकलों पर क्रेमलिन ने विराम लगाया है। दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि भारत की ओर से रूसी तेल खरीद रोकने का कोई संकेत नहीं मिला है। अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बावजूद भारत–रूस ऊर्जा सहयोग यथावत रहने के संकेत मिले हैं।
By: Yogesh Patel
Feb 03, 20269:43 PM
हाइलाइट्स:
नई दिल्ली, अंतरराष्ट्रीय डेस्क
भारत और अमेरिका के बीच हाल में हुई ट्रेड डील के बाद यह सवाल लगातार उठ रहा था कि क्या इसका असर भारत–रूस संबंधों पर पड़ेगा और क्या भारत रूसी तेल की खरीद में कटौती करेगा। इन कयासों के बीच अब रूस की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
रूस ने स्पष्ट किया है कि भारत की तरफ से तेल खरीद रोकने को लेकर अब तक कोई संकेत नहीं मिला है। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत की ओर से रूसी कच्चे तेल की खरीद बंद करने संबंधी कोई औपचारिक सूचना या बयान रूस को प्राप्त नहीं हुआ है।
पेस्कोव का यह बयान उन रिपोर्ट्स के बीच आया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि अमेरिका के साथ समझौते के चलते भारत रूस से दूरी बना सकता है। खासतौर पर पश्चिमी मीडिया में यह धारणा बनाई जा रही थी कि डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्यापारिक समझौते के बदले भारत रूस के साथ ऊर्जा सहयोग कम कर सकता है। रूस के इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि नई दिल्ली और मॉस्को के बीच कूटनीतिक संवाद पूरी तरह सक्रिय और स्पष्ट है।
भारत के साथ रिश्तों पर रूस का भरोसा
रूस ने केवल तेल आपूर्ति ही नहीं, बल्कि भारत के साथ अपने व्यापक रणनीतिक संबंधों पर भी भरोसा जताया है। पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को, भारत के साथ सहयोग को हर स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह बयान इस ओर इशारा करता है कि रूस, भारत की संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति को समझता है।
भारत लंबे समय से यह रुख अपनाता आया है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है और वह अपने नागरिकों के हित में सबसे अनुकूल शर्तों पर तेल खरीदने का फैसला करता है।
बयान के निहितार्थ
रूस की इस प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते के बावजूद भारत ने अपनी विदेश नीति की स्वतंत्रता बनाए रखी है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और मौजूदा समय में रूस उसका प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में अचानक आपूर्ति रोकना न तो व्यावहारिक है और न ही आर्थिक रूप से आसान।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस का यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश भी देता है कि भारत–रूस संबंध बाहरी दबावों से प्रभावित होने वाले नहीं हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग आगे भी जारी रहेगा।