सतना जिला अस्पताल में 62 जरूरी दवाओं की कमी, मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने की मजबूरी, व्यवस्था पर सवाल।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले के सरकारी अस्पतालों में दवा व्यवस्था इन दिनों बेपटरी हो चुकी है, हालात ये हैं कि जिले के सबसे बड़ी सरकारी अस्पताल में ही 62 प्रकार की दवाईयां उपलब्ध नहीं हैं। बेहतर चिकित्सा सुविधा कीउम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को उचित इलाज मिलना तो दूर, अस्पतालों में पूरी दवा तक नसीब नहीं हो पा रही। मजबूरन मरीज आधी-अधूरी दवाएं लेकर लौटने को विवश हैं, जिससे न केवल उनका उपचार प्रभावित हो रहा है, बल्कि बीमारी के गंभीर होने का खतरा भी बढ़ गया है। जिला अस्पताल सहित सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगातार दवाओं की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। मरीजों का कहना है कि पर्ची पर लिखी गई कई जरूरी दवाएं अस्पताल की फामेर्सी में उपलब्ध नहीं होतीं। ऐसे में मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं, जो गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रही हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि दवाओं की आपूर्ति को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी।
चिकित्सकों की संख्या तो बढ़ी लेकिन सुविधाएं नहीं
मेडिकल कॉलेज आजाने के बाद जिला अस्पताल में चिकित्सकों की तादाद तो बढ़ गई है लेकिन कई सुविधाएं अभी भी मरीजों की पहुंच से दूर बनी हुई हैं। शुक्रवार को आईड्रॉप,एंटिफंगल दवा, मिर्गी की दवा एवं कुछ एंटीबायोटिक का स्टॉक खत्म मिला। यहां तक की रक्त वाहिकाओं को शिथिल करके हृदय को रक्त और आॅक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाकर और हृदय पर पड़ने वाले भार को कम करने वाली दवाएं भी खत्म थी। दवा काउंटर पर मौजूद फार्मासिस्ट द्वारा इसे से या जन औषधि केंद्र से खरीदने के लिए सलाह दी गई।
कुछ दवाइयों की कमी है। बीते दिनों 100 से अधिक दवाओं का डिमांड भेजी गई है। शासन से भी निर्देश हैं कि अब 45 दिन के बजाय 30 दिन में ही औषधियों को अस्पतालों में भेजना है।
डॉ. अमर सिंह, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, सतना
पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत पर इलाज कराने जिला अस्पताल आया था। चिकित्सक द्वारा कई प्रकार की दवाएं लिखी गई हैं लेकिन दवा काउंटर पर कुछ ही दवाएं मिली हैं, बाकी की दवाएं बाहर से लेने के लिए कहा गया है।
शिव रावत, नई बस्ती
डायबिटीज बढ़ी हुई है, जिसके इलाज के लिए अस्पताल आया था। चिकित्सक द्वारा लिखी दवाइयों में से कुछ दवाइयां ही यहां उपलब्ध हुई हैं। दवा काउंटर में बड़ी अव्यवस्था है। यहां दिव्यांगों के लिए अलग से काउंटर नहीं बना है जिससे दिव्यांगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शिव चरण कुशवाहा, सतना
ये दवाइयां आउट ऑफ स्टॉक
वर्तमान समय में जिला अस्पताल के दवा काउंटर पर जो दवाईयां आउट आॅफ स्टॉक हैं यदि उनकी बात करे तो सात दवाईयां ऐसी हैं जिनका स्टॉक खत्म हैं।

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रीवा में अमहिया रोड चौड़ीकरण से पहले प्रशासन सख्त हुआ। करीब 200 दुकानें प्रभावित हैं। दुकानदारों को स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए, अन्यथा बुलडोजर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
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सतना के उचेहरा में मजदूरी मांगने पर अधेड़ की बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोप है कि पहले शराब पिलाई गई और फिर पीट-पीटकर घायल किया गया, जिसकी अस्पताल में मौत हो गई।
रीवा संभाग में गेहूं उत्पादन 4.19 लाख एमटी अनुमानित है। सतना और रीवा आगे हैं, जबकि मऊगंज और सिंगरौली पीछे। पंजीकृत किसानों में से केवल आधे ही समर्थन मूल्य पर उपज बेच पाएंगे।

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