सतना की फल-सब्जी मंडी में सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। सड़े कचरे और दुर्गंध से व्यापारी व ग्राहक परेशान हैं, जबकि नियमित सफाई की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
By: Star News
Jan 16, 20264:13 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
कृषि उपज मंडी समिति के अंतर्गत संचालित फल-सब्जी प्रांगण में साफ-सफाई की बदहाल व्यवस्था ने व्यापारियों और ग्राहकों की परेशानी बढ़ा दी है। करीब 12 एकड़ में फैले इस प्रांगण में लंबे समय से नियमित सफाई नहीं होने के आरोप लग रहे हैं। सफाई न होने के कारण चारों ओर सड़ा-गला कचरा जमा है। फल और सब्जियों के अवशेषों से उठती दुर्गंध के चलते यहां काम करना दूभर हो गया है। स्थिति यह है कि थोक व्यापारियों के साथ-साथ खरीदारी के लिए आने वाले फुटकर व्यवसायी और आम उपभोक्ता भी बदबू से असहज महसूस कर रहे हैं। इस मंडी प्रबंधन का कहना है कि आधा दर्जन कर्मचारी इसके लिए लगे होते हैं।
केवल अनाज मंडी की सफाई
मंडी प्रशासन ने अनाज मंडी प्रांगण की साफ-सफाई के लिए टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से संविदाकार नियुक्त कर रखा है, जिससे वहां नियमित सफाई होती रहती है। इसके विपरीत फल-सब्जी प्रांगण के लिए ऐसी कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। परिणामस्वरूप यहां रोजाना सफाई नहीं हो पाती और कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है। बारिश या गर्मी के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जब बदबू के साथ मच्छर और मक्खियों की संख्या बढ़ जाती है।
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हर दिन निकलता है क्विंटलों कचरा
फल-सब्जी मंडी में प्रतिदिन अलग-अलग किस्म के फलों और सब्जियों से भरी लगभग पचास ट्रक आती हैं। इनमें से कई ट्रक लंबी दूरी से पहुंचती हैं। परिवहन के दौरान कुछ माल खराब हो जाता है, वहीं पुराना स्टॉक भी बिक्री योग्य नहीं रह पाता। इस कारण रोजाना हजारों किलो सड़ा-गला फल, सब्जियां और अन्य जैविक कचरा निकलता है। कचरे के निस्तारण की कोई स्थायी व्यवस्था न होने से व्यापारी मजबूरी में इसे प्रांगण के एक कोने में फेंक देते हैं। यही कचरा धीरे-धीरे गंदगी और दुर्गंध का स्थायी स्रोत बन गया है।
कई बार उठा चुके हैं मुद्दा
व्यापारियों का कहना है कि वे कई बार मंडी प्रशासन से फल-सब्जी प्रांगण की नियमित साफ-सफाई की मांग कर चुके हैं। उनकी मांग है कि अनाज मंडी की तर्ज पर यहां भी टेंडर के माध्यम से सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। 12 एकड़ जैसे बड़े क्षेत्र की व्यक्तिगत रूप से सफाई कराना न केवल कठिन बल्कि खर्चीला भी है। व्यापारियों का तर्क है कि जब मंडी को सभी प्रकार के शुल्क और कर दिए जाते हैं, तो साफ-सफाई की जिम्मेदारी भी कृषि उपज मंडी समिति की ही बनती है।
6 कर्मचारियों की नियमित ड्यूटी है प्रांगण साफ रखने की। पूर्व में फल विक्रेताओं को कहा जा चुका है कि निर्धारित जगहों पर ही खराब सामग्री फेंके। मैं कल जाकर एक बार फिर फल विक्रेताओं से बात करूंगा।
करूणेश तिवारी, मंडी सचिव, सतना
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