पैर की चोट और पहले राष्ट्रीय मुकाबले के दबाव के बीच सतना के निशांत सिंह परिहार ने राष्ट्रीय शालेय कुराश प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया।
By: Star News
Jan 24, 202612:37 PM
हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
पैर में चोट, दर्द और पहला राष्ट्रीय मुकाबला.. हालात मुश्किल थे, लेकिन हौसला भारी पड़ा। 14 साल से कम उम्र के निशांत सिंह परिहार ने कुराश की राष्ट्रीय शालेय स्पर्धा में जज्बे से खेलते हुए कांस्य पदक जीत लिया। इस तरह से इन खेलों में सतना के सीने में राष्टÑीय स्तर का यह पांचवां पदक है।
राष्ट्रीय शालेय कुराश प्रतियोगिता में अंडर-14 वर्ग के माइनस 50 किलोग्राम भार वर्ग में खेलते हुए निशांत सिंह परिहार ने कांस्य पदक अपने नाम किया। 14 वर्ष से कम उम्र के निशांत के लिए यह पहला राष्ट्रीय स्तर का टूर्नामेंट था, लेकिन सीमित अनुभव के बावजूद उन्होंने दमदार प्रदर्शन कर सभी का ध्यान खींचा।
दर्द ने किया कमजोर
प्रतियोगिता के दौरान निशांत को तमिलनाडु के खिलाड़ी के खिलाफ मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। हार की वजह कमजोरी नहीं, बल्कि चोट रही। निशांत ने बताया कि इससे पहले पंजाब के खिलाड़ी के खिलाफ खेले गए मुकाबले में उनके पैर में चोट लग गई थी। इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अगले मैच में उतरे, लेकिन लगातार दर्द के कारण पूरी ताकत नहीं लगा सके। इसके बावजूद कांस्य पदक तक पहुंचना उनके जज्बे को दर्शाता है।
चार साल से कर रहे अभ्यास
निशांत एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनकी मां नेहा सिंह परिहार गृहणी हैं, जबकि पिता महिपाल सिंह फैब्रिकेशन की दुकान चलाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण होने के बावजूद पिछले चार साल से निशांत लगातार राष्ट्रीय शालेय खेलों की तैयारी कर रहे थे। मेहनत का नतीजा यह रहा कि पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर चयन हुआ और पदक भी हाथ लगा।
जूडो में यूं लिया बदला
निशांत इससे पहले जूडो की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी भाग ले चुके हैं। गुना में हुई स्पर्धा में उन्हें भोपाल और आदिवासी विकास के खिलाड़ियों से हार मिली थी। दिलचस्प बात यह रही कि कुराश प्रतियोगिता में इंदौर में हुए मुकाबले में निशांत ने भोपाल के उसी खिलाड़ी से जीत दर्ज कर पिछली हार का बदला ले लिया।
सेना में जाने का सपना
निशांत की दीदी और जीजा दोनों पुलिस विभाग में पदस्थ हैं। यही वजह है कि निशांत का सपना सेना में जाकर देश सेवा करने का है। वह आगे चलकर एनडीए में चयनित होना चाहते हैं। उनके कोच नमन उपाध्याय के मुताबिक, निशांत में अनुशासन और सीखने की ललक है। सही मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास से वह भविष्य में और बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।