सतना के सोहावल में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रात में चल रही हड्डी फैक्ट्री, दुर्गंध और बीमारियों से जनता परेशान।
By: Yogesh Patel
Feb 15, 20262:45 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
सतना के सोहावल इलाके मेंं स्थित एक हड्डी फैक्ट्री से स्थानीय लोग परेशान हैं। आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद यह फैक्ट्री रात के समय अवैध रूप से संचालित हो रही है, जिससे आसपास का वातावरण प्रदूषित हो रहा है और बीमारियां फैल रही हैं। मेसर्स सोहावल बोन इंडस्ट्रीज नामक यह फैक्ट्री सोहावल स्थित देवीजी मंदिर के बगल में संचालित है, जिसके ठीक पास एक बस्ती भी बसी हुई है। फैक्ट्री से निकलने वाली हड्डियों की सड़ांध और दुर्गंध से सोहावल बस्ती में रहने वाले लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।
कोर्ट ने 13 दिसंबर 2024 को इस फैक्ट्री के प्रॉपराइटर मो. असलम निवासी इटौरा, तहसील रघुराजनगर के विरुद्ध आदेश पारित किया था। इस आदेश में फैक्ट्री को पूरी तरह बंद करने और संग्रहित हड्डियों को हटाने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस आदेश का उल्लंघन करते हुए रात के अंधेरे में फैक्ट्री में काम धड़ल्ले से जारी है। स्थानीय लोगों ने बताया कि मंदिर, आवासीय कॉलोनी और नेशनल हाईवे के नजदीक होने के बावजूद फैक्ट्री प्रबंधन पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है। दुर्गंध के कारण तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं और वातावरण बुरी तरह प्रदूषित हो रहा है। पिछले दिनों प्रशासन ने ताला लगाया था।
पिछले दिनों शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने फैक्ट्री पर ताला लगा दिया था लेकिन इसके बाद भी यह फिर से संचालित हो रही है। स्थानीय नागरिकों ने जिला कलेक्टर, एसडीएम रघुराजनगर ग्रामीण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस अधीक्षक से इसकी शिकायत की है। वे प्रशासन से इस फैक्ट्री को कहीं अन्यत्र स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। सोहावल की जनता की शिकायत पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 152 के अंतर्गत प्रशासन द्वारा प्रकरण भी दर्ज किया गया था साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिवेदित किया गया था कि संस्थान की वैधता 30 सितंबर 2004 तक थी। वर्तमान में संस्थान द्वारा बोर्ड से सहमति नहीं प्राप्त की गई है। इसके बाद भी फैक्ट्री प्रबंधन को कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
हाईकोर्ट का ये है आदेश
इस मामले में हाईकोर्ट जबलपुर ने 24 अक्टूबर 2024 के अपने आदेश में प्रशासन को निर्देशित किया था कि संचालित फैक्ट्री की समस्त प्रक्रियाओं को तुरंत प्रभाव से बंद करें। फैक्ट्री में संग्रहीत सभी हड्डियों को हटाने की व्यवस्था करें। इसके बाद सारे विभागों से एनओसी दिए जाने के बाद ही आगे की कार्यवाही की जाए। कुछ दिनों के लिए यह फैक्ट्री बंद रही है लेकिन फिर से यह फैक्ट्री रात के अंधेरे में उसी प्रकार से संचालित की जाने लगी।
चोरी-छिपे पूरी रात होती है पिसाई
लोगों का कहना है कि बोन हड्डी के संचालक द्वारा उच्च न्यायालय के फैक्ट्री बंद कर देने के आदेश के बाद भी रात्रि में फैक्ट्री खोलकर चोरी छिपे संचालन किया जाता है और हड्डी की पिसाई की जाती है। लोगों का कहना है कि आसपास का वातावरण दूषित रहता है। या तो संचालक यहां से पलायन करे या लोग पलायन करने के लिए मजबूर हो जाएंगे, उधर, इस मामले में सिटी मजिस्ट्रेट एलआर जांगड़े ने जहां जांच कराए जाने की बात कही है तो वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक गणेश बैगा ने बताया कि ग्रामीणों से शिकायतें मिली है। स्थल निरीक्षण कर स्थितियों का जायजा लेंगे।