वर्ष 2026 में शादी की योजना बना रहे हैं? जानें अप्रैल 2026 के सबसे शुभ विवाह मुहूर्त (Vivah Muhurat). अक्षय तृतीया के संयोग और वैशाख मास की इन 8 तिथियों पर बन रहे हैं विशेष योग
By: Ajay Tiwari
Mar 31, 20262:34 PM
हिंदू धर्म में विवाह को केवल एक सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार माना जाता है, जिसे शुभ मुहूर्त में संपन्न करना अत्यंत लाभकारी होता है। साल 2026 में यदि आप भी अपनों की शादी की योजना बना रहे हैं, तो अप्रैल का महीना खुशियों की सौगात लेकर आ रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस महीने में विवाह के लिए 8 विशेष मुहूर्त बन रहे हैं, जो ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के लिहाज से बेहद फलदायी हैं।
अप्रैल 2026 का महीना धार्मिक और व्यावहारिक दोनों दृष्टियों से श्रेष्ठ है। इस दौरान चैत्र और वैशाख मास का अद्भुत संयोग देखने को मिलेगा। वैशाख शुक्ल पक्ष को मांगलिक कार्यों के लिए शास्त्रों में उत्तम माना गया है। इस समय सूर्य देव अपनी मजबूत स्थिति में होते हैं, जिससे वैवाहिक जीवन में ऊर्जा और स्थिरता आती है। साथ ही, मौसम में हल्की गर्माहट और सुहावनापन होने के कारण मेहमानों के लिए भी आयोजन आरामदायक रहते हैं।
पंचांग के अनुसार, अप्रैल माह में शुक्ल पक्ष की प्रधानता के साथ निम्नलिखित तिथियां विवाह संस्कार के लिए सबसे उपयुक्त पाई गई हैं:
| तिथि | दिन | हिंदू पंचांग (पक्ष और तिथि) |
| 15 अप्रैल 2026 | बुधवार | चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, द्वादशी |
| 20 अप्रैल 2026 | सोमवार | वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, द्वितीया |
| 21 अप्रैल 2026 | मंगलवार | वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, तृतीया (अक्षय तृतीया का प्रभाव) |
| 25 अप्रैल 2026 | शनिवार | वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, सप्तमी |
| 26 अप्रैल 2026 | रविवार | वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, अष्टमी |
| 27 अप्रैल 2026 | सोमवार | वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, नवमी |
| 28 अप्रैल 2026 | मंगलवार | वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, दशमी |
| 29 अप्रैल 2026 | बुधवार | वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, एकादशी |
अप्रैल के इन मुहूर्तों में 21 अप्रैल की तिथि विशेष है, क्योंकि यह अक्षय तृतीया के समीप है। शास्त्रों में अक्षय तृतीया को 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दिन बिना पंचांग देखे भी मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। इस दौरान किए गए विवाह अटूट और सुखमय माने जाते हैं।
यद्यपि ये तिथियां सामान्य रूप से सभी के लिए शुभ हैं, परंतु हिंदू ज्योतिष के अनुसार विवाह का अंतिम निर्णय वर और कन्या की जन्म कुंडली के आधार पर ही लिया जाना चाहिए। व्यक्तिगत ग्रह दशा, गण मिलान और अष्टकूट मिलान के लिए किसी अनुभवी ज्योतिषाचार्य से संपर्क करना श्रेष्ठ रहता है ताकि वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहे।