चित्रकूट के भगवान कामतानाथ मुखारविंद मंदिर की पवित्र भूमि पर अवैध कब्जे का मामला गंभीर होता जा रहा है। करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ी इस जमीन पर मकान और दुकानें खड़ी कर दी गई हैं, जबकि राजस्व अभिलेखों में यह भूमि कलेक्टर प्रबंधक के रूप में दर्ज है। न्यायालय के आदेशों के बावजूद प्रशासन और राजस्व विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।
चित्रकूट के ऐतिहासिक मुखारबिंद मंदिर में पहली बार प्रभु कामतानाथ के नाम से बैंक खाता खोला गया। भक्त अब क्यूआर कोड स्कैन कर ऑनलाइन चढ़ोत्री भी कर सकेंगे। दान पेटी से निकली ₹1.05 लाख की राशि को बैंक में जमा कराया गया। संत निर्वाणी अखाड़े को प्रबंधन से हटाकर मंदिर की जिम्मेदारी अब प्रशासन के अधीन है।














