सभी अपने मन से अलगाव और भेदभाव हटाएं। जो भी हिंदू हैं वो एक हैं। सभी मंदिर, जलस्त्रोत और श्मशान गृह सभी के लिए खुले रहें। किसी का मूल्यांकन उसकी जाति, संपत्ति या भाषा से न करें। सामाजिक समरसता हमारी मजबूती बने। हमें एक दूसरों के घर आना-जाना चाहिए। हमें संकटों पर चर्चा को विस्तार देने की बजाए उनके उपायों पर काम करना चाहिए।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास उसके सरसंघचालकों की प्रेरणादायक यात्राओं से जुड़ा है। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से लेकर डॉ. मोहन भागवत तक—छह युगदृष्टाओं ने संगठन, सेवा और राष्ट्रभक्ति की ज्योति को सतत जलाए रखा। इस लेख में जानिए कैसे हर सरसंघचालक ने समय की चुनौतियों में संघ को नई दिशा दी, और हिंदू संस्कृति को राष्ट्र की आत्मा के रूप में स्थापित किया।














