राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने के लिए जनता का सहयोग और दीर्घकालिक विचार जरूरी है। जाति आधारित राजनीति तभी खत्म होगी, जब समाज खुद जातिगत पहचान से ऊपर उठेगा।
भागवत ने कहा कि भारत के विश्वगुरु बनने का सपना निरंतर प्रयासों और सामूहिक अनुशासन के माध्यम से साकार होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह का परिवर्तन वर्तमान पीढ़ी में देखा जा सकता है। उन्होंने कहा- भारत के भविष्य पर संदेह न करें।
संघ प्रमुख ने हिंदू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा- हिंदू कोई जाति नहीं, यह एक विशेषण है। जब भी हमारी एकता खंडित हुई, राष्ट्र पर संकट आया। पूजा पद्धति और देवी-देवता भिन्न हो सकते हैं, परंतु इस विविधता में एकता का भाव ही हमारी संस्कृति का आधारभूत तत्व है।















