जानें क्यों हर घर में होना चाहिए तुलसी का पौधा! यह नकारात्मक ऊर्जा को खत्म कर लाता है सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य लाभ और वास्तु दोष निवारण। तुलसी के धार्मिक, वैज्ञानिक और वास्तु लाभ।

धर्म डेस्क. स्टार समाचार वेब
सनातन धर्म में तुलसी (Tulsi or Holy Basil) के पौधे को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि साक्षात देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है कि जिस घर में तुलसी का वास होता है, वहाँ धन की देवी माँ लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि बनी रहती है। तुलसी एक अद्भुत औषधीय पौधा है, जिसमें आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और वास्तु संबंधी अनेक लाभ निहित हैं।
यह पवित्र पौधा घर के वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार करता है, जिससे मन को शांति और प्रसन्नता मिलती है। यह परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ कई रोगों से भी रक्षा करता है।
तुलसी को घर में लगाने से व्यक्ति को कई तरह के लाभ मिलते हैं, जिनका वर्णन नीचे किया गया है:
वास्तु शास्त्र के अनुसार, तुलसी का पौधा लगाने के लिए उत्तर, उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। इन दिशाओं में पौधा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। ध्यान दें: घर की दक्षिण दिशा में तुलसी का पौधा लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह वास्तु दोष उत्पन्न कर सकता है और लाभ के बजाय हानि पहुंचा सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति रविवार को छोड़कर प्रतिदिन शाम को तुलसी के सामने घी का दीपक जलाता है और रविवार के दिन छोड़कर उसमें जल अर्पण करता है, उसके घर में सदा लक्ष्मी जी का वास रहता है। इसके अलावा, तुलसी को रसोई के पास रखने से पारिवारिक कलह समाप्त होती है।
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल (पत्ते) का उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विष्णु पूजा में अक्षत (चावल) के बजाय तुलसी और आंवले का इस्तेमाल करने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं।
अगर बच्चे जिद्दी हैं, तो तुलसी के पौधे को पूर्व दिशा की खिड़की के पास रखने से उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आ सकता है और उनका जिद्द करना बंद हो सकता है।
विवाह में देरी: यदि किसी लड़की के विवाह में देरी हो रही है, तो उसे तुलसी को अग्नि कोण (दक्षिण-पूर्व) में रखकर नित्य जल अर्पण करना चाहिए।
व्यापार में उन्नति: अगर आपका व्यापार ठीक से नहीं चल रहा है, तो तुलसी को दक्षिण-पश्चिम कोने में रखें और हर शुक्रवार को कच्चा दूध अर्पण करें। इसके बाद मिठाई का भोग लगाकर किसी सुहागिन स्त्री को मीठी वस्तु दान करें, इससे व्यापार में प्रगति होती है।
धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के अनुसार, तुलसी का पौधा आने वाली मुसीबतों के बारे में पहले ही संकेत दे देता है। मान्यता है कि जिस घर पर विपत्ति आने वाली होती है, वहाँ से सबसे पहले देवी लक्ष्मी यानी तुलसी का पौधा सूखने लगता है या नष्ट हो जाता है, क्योंकि दरिद्रता और अशांति वाले स्थान पर लक्ष्मी जी का निवास नहीं होता।
आयुर्वेद और ज्योतिष दोनों में ही तुलसी का विशेष स्थान है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, तुलसी का पौधा बुध ग्रह के कारण सुख प्रदान करता है, क्योंकि बुध ग्रह हरियाली का प्रतीक है।
यह पौधा सर्दी-जुकाम और खांसी जैसी आम समस्याओं के लिए किसी डॉक्टर से कम नहीं है।
यह वास्तु दोष को दूर करने में भी सक्षम है।
जन्म से लेकर मृत्यु तक काम आने वाला यह पौधा घर के सभी दोषों को दूर करके लोगों को निरोग और सुखी जीवन प्रदान करता है।
ध्यान रखे....
इन दिनों जल न चढ़ाएं: प्रत्येक रविवार, एकादशी और सूर्य व चंद्र ग्रहण के दिन तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए।
पत्ते न तोड़ें: इन खास दिनों में और सूर्य छिपने के बाद तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।
सूखा पौधा: घर में कभी भी सूखा तुलसी का पौधा नहीं रखना चाहिए, इसे अशुभ माना जाता है। ऐसे पौधे को किसी पवित्र स्थान पर विसर्जित करके तुरंत नया पौधा लगाना चाहिए।

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